Foods & Inns के नतीजे और निवेशकों का टकराव: Q3 FY26 में क्या हुआ?
Foods & Inns Limited, जो फ्रूट प्रोसेसिंग और फ्रोजन फूड सेक्टर में एक अहम खिलाड़ी है, ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की तीसरी तिमाही (जो 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई) में चुनौतीपूर्ण नतीजों की घोषणा की है। कंपनी के हालिया फाइनेंशियल नतीजों में मुनाफे में बड़ी गिरावट और नौ महीनों के रेवेन्यू में साल-दर-साल कमी देखी गई है। इस बीच, एक तीखी अर्निंग्स कॉल में मैनेजमेंट का एक निवेशक के साथ टकराव भी सामने आया, जिसने गवर्नेंस (Governance) से जुड़ी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
तिमाही नतीजों पर एक नजर
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीन महीनों की अवधि के लिए, Foods & Inns का कुल सेल्स टनेज (Sales Tonnage) पिछले साल की तुलना में सपाट रहा। इस ठहराव का मुख्य कारण अमेरिका के ग्राहकों द्वारा टैरिफ (Tariff) संबंधी अनिश्चितताओं के चलते ऑर्डर टालना है। इसी वजह से कंपनी को एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) में भी गिरावट का सामना करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने कम रॉ मटेरियल (Raw Material) लागत पर तैयार इन्वेंटरी (Inventory) बेची।
हालांकि, कंपनी का फ्रोजन फूड सेगमेंट (Frozen Food Segment) एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। इस सेगमेंट में Q3 में वॉल्यूम (Volumes) में साल-दर-साल लगभग 35% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, FY26 के पहले नौ महीनों में यह ग्रोथ 37% रही।
फाइनेंसियल डीटेल्स और EBITDA में गिरावट
फ्रोजन फूड सेगमेंट के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, अप्रैल से दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में कंसोलिडेटेड (Consolidated) रेवेन्यू ₹580 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹610 करोड़ था। मुनाफे पर और भी ज्यादा असर पड़ा, जो ₹20 करोड़ से घटकर ₹12 करोड़ रह गया, हालांकि फाइनेंस कॉस्ट (Finance Costs) में कुछ बचत हुई।
स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर, नौ महीनों के लिए ग्रॉस प्रॉफिट (Gross Profit) में 8.7% की मामूली बढ़ोतरी के साथ ₹235 करोड़ दर्ज किया गया। लेकिन EBITDA में लगभग ₹10 करोड़ की गिरावट आई। इस गिरावट की एक वजह मार्क-टू-मार्केट (MTM) फॉरेक्स (Forex) लॉस (Loss) भी रहे, जिन्होंने EBITDA फिगर को ऑप्टिकली प्रभावित किया। इसके अलावा, फ्रेट (Freight) और ऑपरेशनल एक्सपेंसेस (Operational Expenses) में बढ़ोतरी भी जिम्मेदार रही। कंसोलिडेटेड तस्वीर को कुसुम बिजनेस (Kusum Business) से और भी धक्का लगा है, जो फिलहाल भौगोलिक विस्तार और ब्रांड बिल्डिंग (Brand Building) में निवेश के कारण EBITDA लॉस झेल रहा है।
निवेशक और मैनेजमेंट के बीच टकराव
Q3 FY26 की अर्निंग्स कॉल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैनेजमेंट और एक निवेशक, वेंकटेश रंगनाथन, के बीच टकराव था। जब उनसे आक्रामक तरीके से सवाल पूछे गए, तो मैनेजमेंट ने जवाब दिया, "If you're going to talk so rudely, we don't need to necessarily give you answers"। इस तरह की प्रतिक्रियाएं पारदर्शिता को लेकर कंपनी की संवेदनशीलता या शेयरधारक चिंताओं को पूरी तरह संबोधित करने की अनिच्छा का संकेत दे सकती हैं।
कर्ज का बढ़ता बोझ
Foods & Inns की बैलेंस शीट (Balance Sheet) के अनुसार, दिसंबर 2025 तक कुल कंसोलिडेटेड कर्ज (Debt) लगभग ₹460 करोड़ था। इसमें लगभग ₹50 करोड़ का लॉन्ग-टर्म डेट (Long-term Debt) और ₹410 करोड़ की शॉर्ट-टर्म बरोइंग्स (Short-term Borrowings) शामिल हैं, जो मुख्य रूप से वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की जरूरतों के लिए हैं। मार्च 2025 में ₹360 करोड़ के मुकाबले शॉर्ट-टर्म डेट में यह बढ़ोतरी, संचालन और इन्वेंटरी के लिए कंपनी की तत्काल वित्तपोषण पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाती है।
कंपनी को RBI रेट कट (Rate Cuts) के कारण कम फाइनेंस कॉस्ट का फायदा हुआ और कुछ कर्ज चुकाए भी गए। फिर भी, फंड की मिली-जुली लागत 9.2% से 9.8% के बीच बनी हुई है।
आगे की रणनीति और उम्मीदें
मैनेजमेंट ने EBITDA और ग्रॉस प्रॉफिट में 10%-15% की साल-दर-साल ग्रोथ का आंतरिक लक्ष्य रखा है। मुख्य रणनीतिक प्राथमिकताओं में स्प्रे ड्राइंग कैपेसिटी (Spray Drying Capacity) का विस्तार, इंटरनेशनल टेट्रा रिकार्ट पैकेजिंग सॉल्यूशंस (International Tetra Recart Packaging Solutions) पर काम आगे बढ़ाना (FY27 में वॉल्यूम ग्रोथ को 5x-6x करने का लक्ष्य), ब्रांडों को मजबूत करना और ऑटोमेशन (Automation) व सोलर एनर्जी (Solar Energy) में निवेश करना शामिल है।
आम (Mango) के अलावा अन्य उत्पादों जैसे अमरूद, टमाटर, मिर्च और अदरक में एक बड़े डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) पर काम चल रहा है, जिसके लिए अधिक वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता होगी। Pectin प्रोजेक्ट, जिसके FY27 से कमर्शियलाइज़ (Commercialize) होने की उम्मीद है, को भविष्य के मार्जिन (Margins) और EBITDA के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है।
मुख्य जोखिम और चुनौतियां
- US टैरिफ अनिश्चितता: यह एक बड़ा ओवरहैंग (Overhang) बनी हुई है, जो ऑर्डर और सेल्स वॉल्यूम को प्रभावित कर रही है।
- परफॉर्मेंस में गिरावट: नौ महीने की अवधि के लिए रेवेन्यू और प्रॉफिट में साल-दर-साल कमी एक स्पष्ट चिंता का विषय है।
- उच्च कर्ज स्तर: वर्किंग कैपिटल के लिए शॉर्ट-टर्म डेट पर भारी निर्भरता वित्तीय जोखिम पैदा करती है।
- मैनेजमेंट-इन्वेस्टर में टकराव: अर्निंग्स कॉल के दौरान रक्षात्मक प्रतिक्रिया गवर्नेंस चुनौतियों का संकेत दे सकती है।
- मौसमीता और वर्किंग कैपिटल की जरूरतें: व्यवसाय की मौसमीता और नए उत्पाद लाइनों में विस्तार के लिए सावधानीपूर्वक वर्किंग कैपिटल प्रबंधन की आवश्यकता है।
पियर्स (Peers) से तुलना
Foods & Inns फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में काम करती है, जिसमें Nestle India, Britannia Industries और ITC Foods जैसे बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। जबकि बड़े खिलाड़ी अक्सर विविध रेवेन्यू स्ट्रीम और मजबूत ब्रांड इक्विटी से लाभान्वित होते हैं, Foods & Inns का फ्रोजन फूड जैसे विशिष्ट सेगमेंट पर ध्यान और इसके एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मॉडल अद्वितीय अवसर प्रदान करते हैं।
Capital Foods (Ching's Secret जैसे ब्रांडों के लिए जानी जाती है) या Mrs. Bectors Food Specialities (Cremica जैसे ब्रांडों के साथ) जैसी कंपनियां भी संबंधित सेगमेंट में काम करती हैं। फूड सेक्टर की कई कंपनियों ने मिश्रित प्रदर्शन देखा है, कुछ ने प्रीमियम-आइजेशन ट्रेंड और कन्वीनियंस फूड की बढ़ी हुई मांग से लाभ उठाया है। हालांकि, इनपुट लागत की अस्थिरता और सप्लाई चेन में व्यवधान पूरे उद्योग में आम चुनौतियां रही हैं। Foods & Inns की विशिष्ट चुनौतियां, जैसे US टैरिफ और इसके वर्तमान ऋण स्तर, इसे व्यापक सेक्टर रुझानों से अलग करती हैं, जिससे पियर्स की तुलना में इसके ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन और फाइनेंशियल मैनेजमेंट पर करीब से नजर डालने की आवश्यकता होती है।
