Food Sector Crisis: सेफ्टी एक्सपर्ट्स की भारी कमी से बढ़ा कंपनियों का खर्चा, मुनाफे पर दिखेगा असर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Food Sector Crisis: सेफ्टी एक्सपर्ट्स की भारी कमी से बढ़ा कंपनियों का खर्चा, मुनाफे पर दिखेगा असर

भारतीय फूड इंडस्ट्री में इस समय कुशल सेफ्टी प्रोफेशनल्स की किल्लत चल रही है। सख्त सरकारी नियमों के कारण कंपनियों को इन एक्सपर्ट्स को रखने के लिए भारी भरकम सैलरी देनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर FMCG और QSR कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।

भारत का फूड सेक्टर इस समय एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। कुशल सेफ्टी और कंप्लायंस एक्सपर्ट्स की कमी ने FMCG कंपनियों, रेस्टोरेंट चेन और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के ऑपरेशंस को मुश्किल में डाल दिया है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) की बढ़ती निगरानी के बीच, कंपनियों को अपने लाइसेंस बचाने और क्वालिटी मेंटेन रखने के लिए इन प्रोफेशनल को हर हाल में हायर करना पड़ रहा है।

रेगुलेटरी दबाव से हायरिंग में तेजी

सरकारी जांच का दायरा अब रिकॉर्ड स्तर पर है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में देशभर में 5,00,000 से ज्यादा इंस्पेक्शन किए गए, जिनमें से कई सैंपल फेल रहे। अब सेफ्टी कोई बैक-ऑफिस का काम नहीं, बल्कि सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। रिक्रूटमेंट डेटा के मुताबिक, सितंबर 2026 की तिमाही में सेफ्टी और कंप्लायंस रोल के लिए जॉब पोस्टिंग्स में 94.4% का जबरदस्त उछाल आया है। PepsiCo और LT Foods जैसी कंपनियां भी इन एक्सपर्ट्स को पाने के लिए आपस में होड़ लगा रही हैं।

बढ़ती सैलरी और ऑपरेशंस की दिक्कतें

ISO 22000 और HACCP फ्रेमवर्क के जानकार एक्सपर्ट्स की कमी के कारण उनकी सैलरी में 90% तक का प्रीमियम देखा जा रहा है। कंपनियां ऑपरेशन रोकने के डर से इन एक्सपर्ट्स को ऊंची सैलरी देकर हायर कर रही हैं, जिससे कंपनी के खर्चे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, भर्ती की प्रक्रिया में लगने वाला समय भी पिछले 18 महीनों में 25% तक बढ़ गया है।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

इन्वेस्टर्स के लिए चिंता की बात कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन है। ट्रेनिंग प्रोग्राम्स (FoSTaC) और भर्ती पर होने वाला अतिरिक्त खर्च अब कंपनियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। खासकर क्विक-कॉमर्स और QSR चेन के लिए, जो तेजी और हाई-वॉल्यूम पर काम करते हैं, सेफ्टी का कोई भी गैप उनके ऑपरेशंस को ठप कर सकता है। सरकारी फूड सेफ्टी ऑफिसर्स के 30% पद खाली होने से पूरी जिम्मेदारी अब कंपनियों के कंधों पर आ गई है। नतीजों के दौरान निवेशकों को कंपनियों के बढ़ते एम्प्लॉई कॉस्ट और कंप्लायंस खर्च पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.