दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, अनाम दानदाता फ़ूड डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों को खाना भेज रहे हैं। इस अचानक बढ़ी मांग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नए उपयोग को उजागर किया है।
Detailed Coverage
जंतर मंतर पर लजीज 'डोनेशन'
दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल पर हाल के दिनों में फ़ूड और पानी की सप्लाई में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। हैरानी की बात यह है कि यह सप्लाई Zomato और Swiggy जैसे फ़ूड डिलीवरी ऐप्स के ज़रिए हो रही है। 20 जुलाई के बाद से, देश के अलग-अलग शहरों जैसे नागपुर और छत्तीसगढ़ से लोग प्रदर्शनकारियों के लिए गुमनाम रूप से खाने का ऑर्डर दे रहे हैं।
डिजिटल डोनेशन का नया तरीका
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद वॉलंटियर्स का कहना है कि ये ऑनलाइन ऑर्डर ही प्रदर्शनकारियों के लिए खाने का मुख्य जरिया बन गए हैं। लोग दूर बैठे ही ऑर्डर प्लेस कर रहे हैं, जो सीधे प्रोटेस्ट साइट पर डिलीवर हो रहे हैं। इस 'रिमोट डोनेशन' की वजह से सप्लाई इतनी ज़्यादा हो गई है कि खाने के डिस्ट्रिब्यूशन पॉइंट दिन भर खुले रह रहे हैं ताकि सभी को ज़रूरत का सामान मिल सके।
टेक्नोलॉजी का बदलता चेहरा
यह ट्रेंड दिखाता है कि कैसे आम कंज्यूमर-फेसिंग टेक्नोलॉजी अब सोशल एक्टिविटीज़ में भी अहम भूमिका निभा रही है। जहाँ ये प्लेटफॉर्म्स आम तौर पर पर्सनल सुविधा के लिए बनाए गए थे, वहीं अब ये सामूहिक लॉजिस्टिक्स को भी संभव बना रहे हैं, जिससे वे लोग भी अपना योगदान दे पा रहे हैं जो फिजिकली मौजूद नहीं हो सकते।
आगे क्या?
साइट पर लॉजिस्टिक्स का मैनेजमेंट वॉलंटियर्स की टीम कर रही है। इतनी बड़ी मात्रा में खाना आ रहा है कि अतिरिक्त सप्लाई को प्रोटेस्ट एरिया के बाहर जरूरतमंदों तक भी पहुंचाया जा रहा है। यह तरीका प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रैक्टिकल सपोर्ट सिस्टम बन गया है।
मार्केट एनालिस्ट्स और इन्वेस्टर्स अक्सर Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स के यूज़ पैटर्न पर नज़र रखते हैं, क्योंकि यह कंज्यूमर बिहेवियर और प्लेटफॉर्म यूटिलिटी के बारे में जानकारी देता है। जंतर मंतर का यह मामला दिखाता है कि कैसे ये सर्विसेज़ बड़े पैमाने पर, डिसेंट्रलाइज्ड सपोर्ट नेटवर्क को फैसिलिटेट कर सकती हैं। आगे यह देखना होगा कि ये डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स इस तरह के हाई-वॉल्यूम, अनकन्वेंशनल डिलीवरी पैटर्न को कैसे मैनेज करते हैं।
