ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। कंपनी अपने करीब 150 कर्मचारियों की जांच कर रही है, जिन पर वेंडर्स से अनुचित लाभ लेकर उन्हें बेहतर 'Product Placement' दिलाने का आरोप है।
जांच का दायरा और आरोप
यह पूरा मामला मुख्य रूप से कंपनी के स्मार्टफोन और लगेज कैटेगरी से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों ने कुछ वेंडर्स से गुप्त तौर पर पैसे लिए, ताकि उनके प्रोडक्ट्स को प्लेटफॉर्म पर बेहतर विजिबिलिटी और प्राथमिकता मिल सके। इस तरह की धांधली के कारण उन छोटे सेलर्स के साथ नाइंसाफी होती है जो बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्यों है यह मामला गंभीर?
यह पिछले 3 सालों में Flipkart की पेरेंट कंपनी Walmart द्वारा की गई तीसरी बड़ी इंटरनल जांच है। इतने कम समय में बार-बार सामने आ रहे गवर्नेंस के मुद्दे कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स और कंप्लायंस पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। एक ऐसी कंपनी के लिए जो लाखों छोटे कारोबारियों का बाजार है, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना उसकी साख के लिए बेहद जरूरी है।
IPO की तैयारियों पर असर
Flipkart की नजरें फिलहाल शेयर बाजार में लिस्टिंग (IPO) पर हैं। किसी भी कंपनी के लिए पब्लिक मार्केट में उतरने से पहले बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस होना पहली शर्त होती है। बार-बार होने वाली ऐसी जांच निवेशकों का भरोसा हिला सकती है और रेगुलेटर्स की निगरानी भी बढ़ा सकती है।
कंपनी की फाइनेंशियल सेहत
हालांकि कंपनी विवादों में है, लेकिन ऑपरेशन्स के मामले में उसने ग्रोथ दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में Flipkart Internet का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹1,45,880 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 18% ज्यादा है। कंपनी का नेट लॉस भी थोड़ा कम होकर ₹8,468 करोड़ पर आ गया है, जो पहले ₹8,646 करोड़ था। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपनी नीतियों में कितनी सख्ती लाती है और इन्वेस्टर्स का विश्वास कैसे बरकरार रखती है।
