Flipkart ने अपने क्विक कॉमर्स सर्विस 'Minutes' को रफ्तार देने के लिए रेणुका सिंगाराम को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। कंपनी एक तरफ Blinkit और Zepto जैसे दिग्गजों को टक्कर देने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर उसे **₹8,468 करोड़** के घाटे और पूर्व कर्मचारियों के ESOP लिक्विडिटी विवाद का सामना करना पड़ रहा है।
लीडरशिप में बदलाव और नई रणनीति
Flipkart ने रेणुका सिंगाराम को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोट किया है। अब वह कंपनी के 'Minutes' क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ-साथ नॉन-लार्ज आइटम्स की सप्लाई चेन और डिजाइन ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी इंस्टेंट डिलीवरी के मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आक्रामक रूप से डार्क स्टोर्स और लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स को मजबूत कर रही है।
फाइनेंशियल ईयर FY26 के आंकड़े
वित्तीय मोर्चे पर कंपनी के सामने ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है। FY26 के दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹145,880 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल 18% की बढ़त दिखाता है। हालांकि, इतने बड़े कारोबार के बावजूद कंपनी को ₹8,468 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस उठाना पड़ा है। हालांकि यह पिछले साल के ₹8,646 करोड़ के नुकसान से मामूली सुधार है, लेकिन इन्वेस्टर्स की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी नई क्विक कॉमर्स सर्विस से मार्जिन कैसे सुधारती है।
ESOP को लेकर बढ़ता तनाव
इन सबके बीच, कंपनी के अंदरूनी विवाद भी गहराते जा रहे हैं। 1,000 से ज्यादा पूर्व कर्मचारियों ने ESOP लिक्विडिटी को लेकर मोर्चा खोल दिया है। चूंकि Flipkart एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए कर्मचारी आसानी से अपने शेयर बाजार में नहीं बेच सकते। वे कंपनी द्वारा आयोजित बायबैक या सेकेंडरी सेल पर निर्भर रहते हैं। नाराज पूर्व कर्मचारियों ने अब कंपनी बोर्ड और Walmart से बेहतर लिक्विडिटी विंडोज की मांग की है। अब कंपनी के लिए एक तरफ बिजनेस विस्तार और दूसरी तरफ इन आंतरिक उम्मीदों को पूरा करना एक बड़ी परीक्षा बन गई है।
