छोटे शहरों में होटल मार्केट का विस्तार तेजी से हो रहा है। बिजनेस फैमिलीज और रियल एस्टेट डेवलपर्स साल 2025 में **64,000** ब्रांडेड होटल रूम्स के साथ मैदान में हैं, जो निवेशकों के लिए आय का नया जरिया बन सकता है।
भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो 64,000 नए ब्रांडेड होटल रूम्स साइन किए गए हैं, जिनमें से 70% डेवलपमेंट मेट्रो शहरों के बाहर हो रहा है। मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारी परिवार अब होटल सेक्टर में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
यह मॉडल कैसे काम करता है?
इस बदलाव के पीछे एक स्मार्ट रणनीति है। स्थानीय मालिक जमीन और कैपिटल (पूंजी) मुहैया कराते हैं, जबकि बड़ी होटल चेन ब्रांडिंग और ऑपरेशंस संभालती हैं। इससे ब्रांड्स को बिना अपना पैसा लगाए तेजी से विस्तार करने का मौका मिलता है, वहीं कारोबारी परिवारों को अपने ट्रेडिशनल बिजनेस से इतर कमाई का एक नया जरिया मिलता है।
तेजी की मुख्य वजहें
देश में नए एयरपोर्ट्स और हाईवे के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है। साथ ही, बिजनेस, लीजर (Leisure) और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते क्रेज ने टियर-2 और टियर-3 शहरों को निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है।
नए निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालांकि, यह राह आसान नहीं है। होटल का संचालन करना मुख्य बिजनेस से बिल्कुल अलग है, जहाँ हर दिन सर्विस स्टैंडर्ड्स बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: कंस्ट्रक्शन में देरी और लागत बढ़ने से प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है।
- मैनेजमेंट का टकराव: होटल मालिक और ब्रांड के बीच मेंटेनेंस कॉस्ट या रेवेन्यू शेयरिंग को लेकर अनबन हो सकती है, जो एग्रीमेंट खत्म होने तक का कारण बन सकती है।
निवेशकों को अब इन होटल्स के ऑक्यूपेंसी रेट और प्रॉफिट कमाने की रफ्तार पर नजर रखनी चाहिए। क्या ये छोटे शहर लोन चुकाने लायक पर्याप्त डिमांड पैदा कर पाएंगे? यह आने वाले समय का सबसे बड़ा सवाल है।
