FSSAI ने पश्चिम बंगाल की दो कंपनियों, Kailash Formulation और Sanecure Water Project के ऑपरेटिंग लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। इन कंपनियों में साफ-सफाई में गंभीर लापरवाही और फर्जी रिकॉर्ड पाए गए हैं, जो फूड और वाटर इंडस्ट्री में बढ़ती सख्त रेगुलेटरी निगरानी को दर्शाता है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पश्चिम बंगाल के पैक्ड वाटर सेक्टर में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। दक्षिण 24 परगना जिले में हुई अचानक छापेमारी के बाद, रेगुलेटर ने Kailash Formulation और Sanecure Water Project के कामकाज पर रोक लगा दी है।
गंभीर लापरवाही का खुलासा
निरीक्षण के दौरान वहां सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों में भारी खामियां पाई गईं। जांच में कीड़े-मकौड़ों का प्रकोप, जंग लगी मशीनें और कर्मचारियों के लिए हैंड-वॉश जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी देखी गई। Sanecure Water Project के मामले में तो धांधली और भी गंभीर थी; वहां के वाटर टेस्टिंग लैब रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जबकि मेंटेनेंस लॉग और कर्मचारियों के मेडिकल रिकॉर्ड गायब थे। इन गंभीर शिकायतों के चलते तुरंत प्रभाव से प्रोडक्शन पर रोक लगा दी गई है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
ये दोनों कंपनियां अनलिस्टेड हैं, इसलिए शेयर बाजार पर इनका सीधा असर नहीं है। लेकिन, यह घटना पूरे FMCG और बेवरेज सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है। FSSAI अब देश भर में मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी को लेकर काफी सख्त हो गया है। हाल ही में राजस्थान में एक नूडल फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई इसी दिशा में एक और बड़ा कदम था।
आने वाले समय में छोटी और मझोली कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग प्रोसेस को अपग्रेड करने का भारी दबाव झेलना पड़ सकता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि अब सुरक्षा मानकों पर खर्च करना कंपनियों के लिए विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। जो कंपनियां इन कड़े नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें न केवल लाइसेंस गंवाने पड़ेंगे, बल्कि भारी कानूनी और रेप्यूटेशनल जोखिम का भी सामना करना पड़ सकता है।
