FSSAI ने चाय में पेस्टिसाइड (Pesticide) के इस्तेमाल को लेकर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इसमें acetamiprid और imidacloprid की अधिकतम मात्रा तय की गई है, जो सीधे तौर पर टी-कंपनियों के ऑपरेशन्स और एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकते हैं।
नियम क्या हैं?
FSSAI ने 16 अक्टूबर, 2026 को एक ड्राफ्ट रेगुलेशन पेश किया है, जिसका मकसद चाय में पेस्टिसाइड रेजिड्यू लिमिट को अंतरराष्ट्रीय मानकों (Codex Alimentarius) के बराबर लाना है। नए प्रस्ताव के तहत acetamiprid की लिमिट 20 mg/kg और imidacloprid की लिमिट 50 mg/kg तय की गई है।
कंपनियों के लिए क्या चुनौती?
भारत में पेस्टिसाइड का औसत इस्तेमाल 0.5 kg प्रति हेक्टेयर है, जो ग्लोबल औसत 2.38 kg प्रति हेक्टेयर के मुकाबले काफी कम है। हालांकि, अब कंपनियों को अपनी फार्मिंग और मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल को और भी ज्यादा सख्त बनाना होगा। जो कंपनियां पहले से ही इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) का पालन कर रही हैं, उन्हें कम मुश्किल होगी, लेकिन बाकी फर्म्स के लिए टेस्टिंग कॉस्ट बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
चाय भारत का एक बड़ा एक्सपोर्ट कमोडिटी है। अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देशों के कड़े मानकों को देखते हुए, अगर कंपनियों ने इन नए नियमों का पालन नहीं किया, तो शिपमेंट रिजेक्शन की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे रेवेन्यू पर चोट लग सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में यह कदम भारतीय चाय की ग्लोबल रेटिंग सुधारने और प्रीमियम ब्रांडिंग में मदद करेगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां इन नए सेफ्टी थ्रेशोल्ड्स को कितनी जल्दी अपनाती हैं।
