FSSAI ने नॉन-डेयरी उत्पादों के लिए 'Paneer' शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मकसद डेयरी लेबलिंग को मानकीकृत करना और उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाना है।
नियम में क्या है बदलाव?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया है, जिसके तहत अब कोई भी कंपनी नॉन-डेयरी या सिंथेटिक उत्पादों को 'पनीर' के नाम से नहीं बेच पाएगी। यह नियम उन मैन्युफैक्चरर्स पर कड़ा प्रहार है जो वेजिटेबल फैट और अन्य सिंथेटिक चीजों का इस्तेमाल करके पनीर जैसा दिखने वाला उत्पाद तैयार करते हैं।
डेयरी कंपनियों के लिए कैसे है फायदे का सौदा?
अब तक डेयरी कंपनियां सस्ते और मिलावटी पनीर विकल्पों से प्राइसिंग का दबाव झेल रही थीं। बाजार में 9 राज्यों, जिनमें महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं, पहले ही इस पर पाबंदी लगा चुके हैं। अब पूरे देश में यह मानक लागू होने से डेयरी सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह निर्देश फूड एंड बेवरेज सेक्टर में पारदर्शिता की ओर इशारा है। जो कंपनियां अभी नकली पनीर बेच रही हैं, उन्हें अब अपनी ब्रांडिंग और पैकेजिंग पूरी तरह से बदलनी होगी। आने वाले समय में कंपनियों के मार्जिन और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के बाद इसकी फाइनल डेडलाइन तय की जाएगी।
