FSSAI का बड़ा एक्शन: दूध और मांस के लिए सख्त हुए नियम, कंपनियों की लागत बढ़ना तय

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FSSAI का बड़ा एक्शन: दूध और मांस के लिए सख्त हुए नियम, कंपनियों की लागत बढ़ना तय

FSSAI ने अब डेयरी और मांस जैसे खराब होने वाले खाने-पीने के सामानों के लिए अनिवार्य तापमान नियंत्रण (Temperature Control) की नई गाइडलाइन जारी की है। इस बदलाव से कंपनियों को अपने कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना होगा, जिससे ऑपरेटिंग लागत बढ़ सकती है।

नियम और सख्त निगरानी

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अब डेयरी उत्पादों जैसे खोआ, पनीर, मांस और मछली के परिवहन के लिए सख्त कोल्ड-चेन इंटीग्रिटी बनाए रखना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सोर्सिंग से लेकर ग्राहक तक डिलीवरी के हर स्टेज पर लागू होगा। अथॉरिटी ने राज्य स्तर के फूड सेफ्टी कमिश्नर्स और रेलवे अधिकारियों को अचानक निरीक्षण (Surprise Inspections) करने की शक्ति दी है। नए मानदंडों के तहत, Schedule 4 का पालन न करने पर स्टॉक को जब्त या नष्ट भी किया जा सकता है।

कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?

कंपनियों को अब अपने वाहनों को विशेष रूप से फूड ट्रांसपोर्ट के लिए तैयार करना होगा, जिसमें सटीक तापमान निगरानी तकनीक (Temperature Monitoring Technology) होनी चाहिए। इसके अलावा, कंपनियों को उत्पादन से लेकर डिलीवरी तक के हर रिकॉर्ड और इनवॉइस का ऑडिट ट्रेल भी रखना होगा।

निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?

बाजार के नजरिए से देखें, तो बड़ी और संगठित फूड कंपनियां, जिनके पास पहले से ही कोल्ड-चेन नेटवर्क मौजूद है, उन्हें कम परेशानी होगी। हालांकि, छोटी और असंगठित कंपनियों के लिए यह बदलाव भारी पड़ सकता है। इन कंपनियों को नई तकनीक और रेफ्रिजरेटेड वाहनों में निवेश करना होगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। यह कदम सेक्टर में बड़े खिलाड़ियों के एकाधिकार को और मजबूत कर सकता है क्योंकि छोटे प्लेयर्स के लिए अनुपालन (Compliance) का बोझ उठाना मुश्किल होगा। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को खुद सोखती हैं या ग्राहकों पर बोझ डालती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.