FSSAI ने फूड स्टार्टअप्स की मदद के लिए एक डेडिकेटेड सेल लॉन्च की है। अब नई कंपनियों को लाइसेंसिंग, लेबलिंग और ई-कॉमर्स अनुपालन (compliance) में आसानी होगी, जिससे प्रोडक्ट लॉन्च की रफ्तार बढ़ेगी।
यह सपोर्ट सिस्टम कैसे करेगा काम?
यह नई सेल उन फाउंडर्स के लिए 'सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट' के रूप में काम करेगी, जिन्हें पहले अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे। रेगुलेटर ने हर हफ्ते ऑनलाइन सेशन शुरू किए हैं, जहां स्टार्टअप्स अपने प्रोडक्ट की कैटेगरी, इंपोर्ट की जरूरतें और विज्ञापन के मानकों पर सीधे सलाह ले सकते हैं। इसके अलावा, जटिल सवालों के लिए एक ईमेल हेल्प डेस्क भी बनाई गई है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
फूड प्रोसेसिंग और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) सेक्टर में दांव लगाने वाले निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव है। स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन की बाधाएं कम होने का मतलब है कि अब कंपनियों की ऑपरेशनल लागत कम होगी और वे अपने नए प्रोडक्ट्स को तेजी से मार्केट में उतार सकेंगी। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि सेफ्टी मानकों में कोई ढील दी गई है। कंपनियों को अब भी क्वालिटी के सभी कड़े पैमानों पर खरा उतरना होगा।
आगे का रास्ता
ऐतिहासिक रूप से, रेगुलेटर का रुख काफी सख्त रहा है। लेकिन इस नए सेल के जरिए, अथॉरिटी यह समझने की कोशिश कर रही है कि स्टार्टअप्स को असल में कहां दिक्कतें आती हैं। आने वाली तिमाहियों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इससे कंपनियों पर लगने वाली पेनल्टी में कमी आती है। यह कदम प्रशासनिक जटिलता को कम करने के लिए है, लेकिन प्रोडक्ट की क्वालिटी बनाए रखने की जिम्मेदारी अब भी बिजनेस मालिकों पर ही रहेगी।
