फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बड़ा अनुरोध किया है। उन्होंने मौजूदा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को बदलकर एक नई, स्वतंत्र सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मकसद भारत के एविएशन सेक्टर में रेगुलेटरी अप्रूवल्स को तेज करना और सुरक्षा की निगरानी को बेहतर बनाना है।
पायलटों की संस्था क्यों चाहती है बदलाव?
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें एक स्वतंत्र, वैधानिक (statutory) सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) बनाने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव 6 अगस्त, 2026 को सौंपा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को बदलना है, जो फिलहाल नागर विमानन मंत्रालय के अधीन काम करता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा डोमेस्टिक एविएशन मार्केट बन गया है। FIP का तर्क है कि DGCA की वर्तमान संरचना इस तेजी से बढ़ते स्केल के लिए अनुकूल नहीं है। चूंकि DGCA मंत्रालय का हिस्सा है, इसलिए इसे प्रशासनिक गति, वित्तीय स्वतंत्रता और विशेषज्ञ कर्मचारियों की भर्ती में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। पायलटों के संगठन ने कहा है कि नियामक (regulator) के पास बाजार-प्रतिस्पर्धी वेतन पर तकनीकी विशेषज्ञों को नियुक्त करने की पर्याप्त छूट नहीं है, जिससे तकनीकी निगरानी और सुरक्षा प्रवर्तन में संभावित कमियां आ सकती हैं।
भारतीय एविएशन इंडस्ट्री, जिसमें InterGlobe Aviation जैसी बड़ी एयरलाइंस और अन्य क्षेत्रीय प्लेयर शामिल हैं, के लिए रेगुलेटरी दक्षता (efficiency) बहुत महत्वपूर्ण है। एयरलाइंस को नए विमानों को शामिल करने, रूट परमिट और पायलट लाइसेंसिंग के लिए रेगुलेटर से समय पर मंजूरी की आवश्यकता होती है। इन नौकरशाही प्रक्रियाओं में किसी भी देरी का असर ऑपरेशनल टाइमलाइन और फ्लीट विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है। अगर सरकार एक वैधानिक अथॉरिटी स्थापित करती है, तो इससे प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित (streamlined) किया जा सकता है और निर्णय लेने में तेजी आ सकती है।
वित्तीय और परिचालन स्वायत्तता (Financial and Operational Autonomy)
प्रस्तावित मॉडल के तहत, नई सिविल एविएशन अथॉरिटी सरकारी अनुदान पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय यूजर फीस और लाइसेंसिंग शुल्कों से फंड प्राप्त करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियामक के पास सुरक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाने और उच्च-कुशल विमानन पेशेवरों को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पूंजी हो। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पहले भी उच्च सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए एविएशन रेगुलेटर की स्वतंत्र फंडिंग के महत्व पर जोर दिया है।
ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियां
यह पहली बार नहीं है जब वैधानिक CAA की ओर बदलाव की चर्चा हुई है। 2013 और 2014 के बीच इसी तरह के विधायी प्रयास किए गए थे, लेकिन वे नीतिगत बदलाव में परिणत नहीं हुए। इस प्रस्ताव को उन्हीं बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है जिन्होंने पिछले प्रयासों को रोक दिया था, जिसमें विधायी मंजूरी की आवश्यकता और सरकारी विभागों के पुनर्गठन की जटिल प्रक्रिया शामिल है।
निवेशकों और उद्योग पर्यवेक्षकों को ध्यान देना चाहिए कि यह फिलहाल एक प्रतिनिधि निकाय का औपचारिक अनुरोध है, न कि कोई सक्रिय सरकारी नीति। महत्वपूर्ण बात यह होगी कि नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या सरकार एक स्वतंत्र विमानन प्राधिकरण के लिए विधायी योजनाओं को फिर से शुरू करने का फैसला करती है। तब तक, DGCA भारत में विमानन से संबंधित सभी गतिविधियों के लिए प्राथमिक नियामक के रूप में कार्य करना जारी रखेगा।
