FIIs की भारतीय बाजार में वापसी! 4 दिन की बिकवाली के बाद ₹755 करोड़ की नेट खरीदारी

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
FIIs की भारतीय बाजार में वापसी! 4 दिन की बिकवाली के बाद ₹755 करोड़ की नेट खरीदारी

4 दिन की लगातार बिकवाली के बाद, विदेशी निवेशकों (FIIs) ने 28 जुलाई को भारतीय इक्विटी में **₹755 करोड़** की नेट खरीदारी की। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने भी **₹1,664 करोड़** का निवेश किया, जिसने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

Detailed Coverage

क्या विदेशी निवेशकों ने बेचा या खरीदा?

28 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की खरीदारी ने बाजार को संभाले रखा। बेंचमार्क इंडेक्स हल्के लाल निशान में बंद हुए। सेंसेक्स 69.86 अंकों की गिरावट के साथ 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक गिरकर 23,985.35 पर आ गया। इस दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सेंटिमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जिन्होंने पिछले पांच सत्रों में पहली बार नेट खरीदारी की।

इंस्टीट्यूशनल बाइंग का हाल

FIIs ने ₹755 करोड़ की नेट खरीदारी की, जो हाल की बिकवाली के बाद एक महत्वपूर्ण बदलाव है। डेटा के अनुसार, FIIs ने कुल ₹17,531 करोड़ की खरीदारी की, जबकि ₹16,776 करोड़ की बिकवाली की। दूसरी ओर, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और ₹1,664 करोड़ की नेट खरीदारी की। घरेलू फंडों द्वारा यह लगातार निवेश उनके सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। इस साल अब तक DIIs की नेट खरीदारी लगभग ₹4.91 लाख करोड़ है, जबकि FIIs इस अवधि में करीब ₹3.50 लाख करोड़ की नेट बिकवाली कर चुके हैं।

बाजार का सेंटिमेंट और ग्लोबल फैक्टर

बाजार में मिली-जुली चाल देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.1% की मामूली बढ़त रही, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.2% नीचे आ गया। आने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग के कारण निवेशकों में सावधानी का माहौल बना हुआ है। घरेलू लिक्विडिटी ने सहारा दिया, लेकिन तिमाही नतीजों के सीजन के कारण बाजार में स्टॉक-विशिष्ट गतिविधियां जारी हैं।

कच्चे तेल की कीमतें और सेक्टर परफॉर्मेंस

निवेशक कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों पर भी नजर रख रहे हैं, जो भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद $84 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। ऊर्जा की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि भारत तेल का एक बड़ा आयातक है। घरेलू सेक्टर में, आईटी (IT) इंडेक्स ने खरीदारी में बढ़ोतरी के कारण सत्र के दौरान अन्य सेगमेंट से बेहतर प्रदर्शन किया। अगले ट्रेडिंग दिन, बाजार की मुख्य नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मीटिंग के नतीजों और कॉरपोरेट आय पर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.