फुटबॉल की वैश्विक संस्था FIFA एक नई $20 अरब की सब्सिडियरी, FIFA फॉरवर्ड एंटरप्राइज, बनाने की योजना बना रही है। यह एंटिटी टूर्नामेंट्स के कमर्शियल ऑपरेशंस को संभालेगी। FIFA प्राइवेट निवेशकों को माइनॉरिटी स्टेक बेचकर $4.2 अरब जुटाने की तैयारी में है, लेकिन UEFA ने गवर्नेंस और पारदर्शिता पर चिंता जताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
FIFA की नई चाल: $20 अरब की सब्सिडियरी का गठन
फुटबॉल की दुनिया पर राज करने वाली संस्था FIFA ने हाल ही में एक बड़ी घोषणा की है। FIFA अपने टूर्नामेंट्स, खासकर FIFA वर्ल्ड कप, के कमर्शियल और ऑपरेशनल राइट्स को मैनेज करने के लिए एक नई कंपनी, FIFA फॉरवर्ड एंटरप्राइज (FIFA Forward Enterprise), बना रही है। इस नई एंटिटी का वैल्यूएशन $20 अरब (लगभग ₹1600 अरब) रखा गया है।
प्राइवेट निवेशकों से ₹34,000 करोड़ जुटाने की तैयारी
इस फाइनेंसियल प्लान के तहत, FIFA अपनी इस नई सब्सिडियरी में प्राइवेट इंस्टीट्यूशनल निवेशकों को 20% तक का माइनॉरिटी स्टेक बेचने की योजना बना रही है। इसका मकसद $4.2 अरब (लगभग ₹34,000 करोड़) का फंड जुटाना है। इस कैपिटल रेज (Capital Raise) के लिए FIFA, JPMorgan के साथ मिलकर काम कर रही है। माना जा रहा है कि निवेशक कंसोर्टियम का नेतृत्व Thrive Capital के फाउंडर Joshua Kushner की फर्म Thrive Eternal करेगी। पूर्व Liberty Media CEO Greg Maffei भी एक कमर्शियल एडवाइजर के तौर पर जुड़े हैं। FIFA का कहना है कि इन बाहरी निवेशकों के पास माइनॉरिटी स्टेक तो होगा, लेकिन कंपनी के ऑपरेशनल, रेगुलेटरी या गवर्नेंस निर्णयों पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पैसा जाएगा FIFA फॉरवर्ड प्रोग्राम में
इस डील से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल FIFA फॉरवर्ड प्रोग्राम (FIFA Forward program) में किया जाएगा। इस प्रोग्राम के जरिए मेंबर एसोसिएशन्स को लोकल फुटबॉल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग और टैलेंट डेवलपमेंट के लिए फंडिंग दी जाती है। FIFA का अनुमान है कि इस मॉडल से हर मेंबर एसोसिएशन को $20 मिलियन (लगभग ₹160 करोड़) तक मिल सकते हैं, और 2035-2038 तक यह रकम बढ़कर $24 मिलियन (लगभग ₹200 करोड़) प्रति एसोसिएशन तक पहुंच सकती है।
UEFA का कड़ा विरोध और गवर्नेंस पर सवाल
हालांकि, FIFA के इस कदम पर यूरोपियन फुटबॉल की गवर्निंग बॉडी UEFA ने कड़ी आपत्ति जताई है। UEFA ने एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर कहा है कि खेल के गवर्नेंस और उसकी पहचान को ट्रेडबल एसेट्स (Tradable Assets) की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। UEFA ने इस नई एंटिटी के फाइनेंशियल बेनिफिशियरीज (Financial Beneficiaries) को लेकर पारदर्शिता की कमी पर गंभीर चिंताएं जताई हैं और चेतावनी दी है कि यह कदम फुटबॉल एडमिनिस्ट्रेशन की इंटीग्रिटी (Integrity) को कमजोर कर सकता है।
यह मामला दोनों संस्थाओं के बीच बढ़ते मतभेद को भी दिखाता है। UEFA लंबे समय से FIFA के सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल (Centralized Control) पर सवाल उठाती रही है, और वर्ल्ड कप एसेट्स के कमर्शियलाइजेशन (Commercialization) को लेकर यह नया विवाद उनके प्रोफेशनल रिलेशनशिप को और तनावपूर्ण बना रहा है। अब देखना यह है कि FIFA इन पारदर्शिता संबंधी चिंताओं को कैसे दूर करती है और क्या अन्य फुटबॉल एसोसिएशन्स, लीग्स और प्लेयर यूनियंस भी UEFA के साथ मिलकर इस डील की जांच करेंगे।
