आधी रात की 'समस्या' का ऑपरेशनल गणित
2026 FIFA वर्ल्ड कप के मैच भारत में देर रात या अगली सुबह शुरू होंगे। ज़्यादातर मैच भारतीय समयानुसार रात 10 बजे के बाद ही होंगे। ऐसे में स्पोर्ट्स बार और पब के लिए बिज़नेस चलाना मुश्किल हो जाएगा। देर रात तक स्टाफ, बिजली और सिक्योरिटी का खर्चा ज़्यादा होता है, लेकिन ग्राहकों की संख्या सीमित रह जाती है। शहरों के नियमों के कारण रात में दुकानें बंद करने की भी समय-सीमा होती है। ऐसे में, बार को देर रात तक चलने वाले ग्राहकों पर निर्भर रहना होगा, जो कि वीक डेज़ (सप्ताह के कार्य दिवसों) पर मुश्किल है।
फुटबॉल से कमाई की स्ट्रक्चरल कमजोरी
समय की दिक्कत के अलावा, भारतीय स्पोर्ट्स मार्केट एक बड़े कमर्शियल बदलाव से गुज़र रहा है। ब्रॉडकास्टर्स और राइट होल्डर्स (अधिकार धारक) पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उन्हें उम्मीद से काफी कम पैसे मिले हैं। भारत में, क्रिकेट कमाई के मामले में सबसे आगे है, क्योंकि हर ओवर, विकेट और बाउंड्री के बाद विज्ञापन का मौका मिलता है। वहीं, फुटबॉल में विज्ञापन के सीमित मौके होने से कमाई कम होती है। ऐसे में, हॉस्पिटैलिटी ऑपरेटर्स के लिए यह इवेंट रेवेन्यू बढ़ाने की जगह एक बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
निवेश पर आशंका: रेगुलेटरी और सप्लाई चेन का रिस्क
इस टूर्नामेंट से होने वाली कमाई पर शक करने के कई कारण हैं। यह सेक्टर पहले से ही महंगे फ्यूल और रेगुलेटरी जांच जैसी दिक्कतों से जूझ रहा है। कई ऑपरेटर्स पहले से ही अपने खर्चों को कम करने और मार्जिन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में, ऐसे टूर्नामेंट पर दांव लगाना, जो पीक टाइम (व्यस्ततम समय) में बिज़नेस को सीमित कर दे, एक बड़ा रिस्क है। ‘माइंडफुल ड्रिंकिंग’ (सोच-समझकर पीना) और मॉकटेल की तरफ बढ़ता झुकाव भी शायद उन ग्राहकों की कमी को पूरा नहीं कर पाएगा जो मैच देखने के लिए बार में आते थे।
भविष्य का नज़ारा
भारतीय स्पोर्ट्स मीडिया का भविष्य अब फिजिकल वेन्यू (भौतिक स्थान) से अलग होता दिख रहा है। राइट होल्डर्स मल्टी-प्लेटफॉर्म डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन की ओर बढ़ रहे हैं, और अब लोग घर बैठे ही मैच देखना पसंद करते हैं। 2026 वर्ल्ड कप इस बदलाव को और मज़बूत करेगा। यह एक उदाहरण होगा कि कैसे भविष्य में ग्लोबल इवेंट्स के लिए स्ट्रीमिंग सेवाएं पारंपरिक हॉस्पिटैलिटी वेन्यूज़ पर हावी होंगी। भारतीय हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के लिए आगे का रास्ता केवल इवेंट्स पर निर्भर रहने की बजाय, कमाई के दूसरे ज़रिए खोजने में है।
