Fishing Industry: समुद्र में अब सैटेलाइट की मदद से होगी मछली पकड़ने की सटीक प्लानिंग

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AuthorMehul Desai|Published at:
Fishing Industry: समुद्र में अब सैटेलाइट की मदद से होगी मछली पकड़ने की सटीक प्लानिंग

जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे भारतीय फिशिंग सेक्टर के लिए नई उम्मीद जगी है। समुद्री वैज्ञानिकों ने अब एडवांस्ड सैटेलाइट मॉनिटरिंग के जरिए मछुआरों को रियल-टाइम डेटा मुहैया कराने का प्रस्ताव रखा है, ताकि मछली ढूंढने में सटीकता और सुरक्षा बढ़ सके।

47वें एशियन कॉन्फ्रेंस ऑन रिमोट सेंसिंग में विशेषज्ञों ने भारतीय फिशिंग इंडस्ट्री के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। बढ़ते समुद्री तापमान और हीटवेव के कारण मछलियों की चाल बदल रही है, जिससे पारंपरिक तरीके अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस नई योजना के तहत, समुद्र के तापमान और रंगों का सटीक डेटा मछुआरों तक पहुंचाया जाएगा।

INCOIS और ICAR की बड़ी पहल

इस तकनीक को जमीन पर उतारने का काम इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) मिलकर कर रहे हैं। सरकार की योजना 'पोटेंशियल फिशिंग जोन' के लिए बेहतर एडवाइजरी जारी करने की है। इससे समुद्र में मछलियों को खोजने का समय बचेगा और ईंधन की खपत भी कम होगी, जो इस सेक्टर की सबसे बड़ी कॉस्ट है।

एक्सपोर्ट और निवेशकों के लिए मायने

हालांकि भारतीय फिशिंग इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनऑर्गनाइज्ड है, लेकिन यह भारत के मरीन एक्सपोर्ट में बड़ा योगदान देता है। बेहतर डेटा से सप्लाई चेन स्थिर होगी, जिससे सीफूड एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को फायदा होगा। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस डिजिटल ढांचे को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है। सप्लाई चेन की अस्थिरता कम होने से इस सेक्टर के लिए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.