Eternal के शेयर में गुरुवार को **2.02%** की गिरावट आई और यह **₹288.85** पर बंद हुआ। शेयर Nifty 50 के टॉप लूज़र्स में से एक रहा। अब निवेशकों का ध्यान **22 जुलाई 2026** को होने वाली बोर्ड मीटिंग पर है, जहाँ जून तिमाही के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
नतीजों से पहले शेयर में आई मंदी
Eternal Limited के शेयरों में गुरुवार को 2.02% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह ₹288.85 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के चलते यह स्टॉक Nifty 50 इंडेक्स पर सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शुमार हो गया। यह गिरावट कंपनी के वित्तीय नतीजे आने से ठीक पहले हुई है।
कंपनी की माली हालत और प्रॉफिट का गणित
पिछले कुछ सालों में कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2022 में ₹4,192.40 करोड़ का रेवेन्यू बढ़कर 2026 तक अनुमानित ₹54,364.00 करोड़ तक पहुँच गया। हालांकि, बॉटम-लाइन परफॉर्मेंस में उतार-चढ़ाव रहा है। 2022 और 2023 में नुकसान झेलने के बाद, कंपनी 2024 में ₹351.00 करोड़ और 2025 में ₹527.00 करोड़ का मुनाफा दर्ज कर प्रॉफिट में वापस लौटी। पूरे साल 2026 में, नेट प्रॉफिट (Net Profit) ₹366.00 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ी नरमी दिखाता है।
मार्च 2026 को समाप्त हुई पिछली तिमाही में, Eternal ने ₹17,292.00 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू रिपोर्ट किया, जो दिसंबर 2025 की तिमाही के ₹16,315.00 करोड़ से ज्यादा है। नेट प्रॉफिट में भी पिछली तिमाही के ₹102.00 करोड़ से बढ़कर ₹174.00 करोड़ हो गया। कंपनी की बैलेंस शीट की सेहत के लिए एक अच्छी बात यह रही कि मार्च 2026 तक ऑपरेटिंग एक्टिविटीज़ से कैश फ्लो ₹632 करोड़ रहा, जिससे नेट कैश फ्लो की पोजीशन ₹330 करोड़ पॉजिटिव रही।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, शेयर के लिए अगली बड़ी हलचल 22 जुलाई 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग होगी। इस मीटिंग में डायरेक्टर 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के अन-ऑडिटेड (Unaudited) वित्तीय नतीजों की समीक्षा और मंजूरी देंगे। कंपनी के रेवेन्यू में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, निवेशक संभवतः इस बात पर ध्यान देंगे कि जून तिमाही के नतीजों में मार्जिन में स्थिरता आती है या वोलेटिलिटी (Volatility) जारी रहती है। कंपनी ने 22 जुलाई को शाम 5:00 बजे IST एक अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल (Earnings Conference Call) भी शेड्यूल की है, जहां मैनेजमेंट की कमेंट्री, भविष्य की मांग, लागत प्रबंधन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) जैसे मुद्दे बाजार के लिए मुख्य रुचि के क्षेत्र होंगे।
