किरणजीत दास, जो पहले ₹15 लाख सालाना कमाते थे, ने बताया कि अब उनका बिजनेस हर महीने सिर्फ ₹12,000 कमा रहा है। यह कहानी नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने के बड़े फाइनेंशियल रिस्क और पारिवारिक जिम्मेदारियों के दबाव को दिखाती है।
उद्यमिता की हकीकत, किरणजीत दास ने खोला बड़ा राज़
उद्यमिता (Entrepreneurship) की राह कितनी मुश्किल हो सकती है, इसका एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। किरणजीत दास, जिन्होंने अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ी थी, जहाँ उन्हें सालाना ₹15 लाख का वेतन मिलता था, अब अपने बिजनेस से हर महीने महज़ ₹12,000 कमा पा रहे हैं। यह जानकारी उन्होंने खुद सार्वजनिक रूप से साझा की है, जिसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आय में भारी गिरावट का असर
दास के इस अनुभव से यह साफ होता है कि नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने में आय की कितनी बड़ी अस्थिरता (Volatility) का सामना करना पड़ सकता है। जहाँ अक्सर बिजनेस की सफलता और लंबे समय में बड़ी कमाई की बातें होती हैं, वहीं यह मामला तत्काल वित्तीय अस्थिरता की सच्चाई को उजागर करता है। खासकर तब, जब किसी को बच्चों की स्कूल फीस और मेडिकल जैसे फिक्स्ड खर्चों को भी संभालना होता है।
करियर बदलने में फाइनेंशियल रिस्क
यह स्थिति निवेशकों और पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। यह इस बात पर जोर देता है कि स्थिर नौकरी छोड़ने से पहले एक मजबूत फाइनेंशियल बफर (Safety Net) रखना कितना जरूरी है। फाइनेंशियल प्लानर्स की सलाह है कि नया बिजनेस शुरू करने के लिए पूरी तरह से उतरने से पहले कम से कम 12 से 24 महीने के खर्चों को कवर करने लायक सेविंग्स होनी चाहिए। इसके बिना, बिजनेस से तुरंत कमाई का दबाव गलत फैसले लेने पर मज़बूर कर सकता है, जो कंपनी के भविष्य के लिए ठीक न हो।
वित्तीय सुरक्षा बनाम बिजनेस का सफर
यह भी देखा गया है कि जिन लोगों के पास पहले से पर्याप्त पूंजी या पारिवारिक सपोर्ट होता है, वे बिजनेस शुरू करने में कम जोखिम उठाते हैं, जबकि जिनके पास ऐसा कोई सहारा नहीं होता, उनके लिए यह सफर काफी मुश्किलों भरा होता है। ऐसे में, उन्हें काफी व्यक्तिगत त्याग करना पड़ता है और पैसे के सही इस्तेमाल में गलती की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है।
बिजनेस के साथ स्थिरता कैसे बनाएं?
कई मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिनके पास ज्यादा कैपिटल नहीं है, उनके लिए धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ाना बेहतर है। यानी, फुल-टाइम जॉब के साथ-साथ बिजनेस को साइड में डेवलप करें। इससे बिजनेस मॉडल की व्यवहार्यता (Viability) को परखे बिना अपनी नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों को खतरे में डालने का रिस्क नहीं रहता।
जैसे-जैसे यह बातचीत आगे बढ़ रही है, नए उद्यमियों (Entrepreneurs) के लिए यह समझना अहम है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक से आगे बढ़कर कैश फ्लो मैनेजमेंट, प्रॉफिट तक पहुंचने में लगने वाला समय और शुरुआती दौर में घर के खर्चों को संभालने के लिए एक स्पष्ट फाइनेंशियल प्लान की जरूरत को समझना ज़रूरी है।
