इंजीनियरिंग में आया बड़ा बदलाव: चिप और AI बूम के चलते स्टूडेंट्स की पहली पसंद बनी इलेक्ट्रॉनिक्स

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
इंजीनियरिंग में आया बड़ा बदलाव: चिप और AI बूम के चलते स्टूडेंट्स की पहली पसंद बनी इलेक्ट्रॉनिक्स

भारत के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स और कोर इंजीनियरिंग को लेकर जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। इंडस्ट्री में हार्डवेयर डिजाइन की बढ़ती मांग के चलते यह बदलाव आया है। सरकारी सेमीकंडक्टर मिशन और AI व इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में चिप्स की जरूरत ने कंप्यूटर साइंस के दबदबे को कम किया है।

Detailed Coverage

इंडस्ट्री की मांग ने बदली पढ़ाई की दिशा

भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। स्टूडेंट्स कंप्यूटर साइंस की जगह इलेक्ट्रॉनिक्स और कोर इंजीनियरिंग को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं। IITs, NITs और BITS पिलानी जैसे संस्थानों में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है, और इसकी सीधी वजह भारत का ग्लोबल सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ता दबदबा है।

क्यों बढ़ रही इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड?

इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर इंजीनियरिंग की लोकप्रियता सिर्फ एक अकादमिक पसंद नहीं है, बल्कि यह इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों का जवाब है। कंपनियां अब एडवांस्ड हार्डवेयर आर्किटेक्चर, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए जरूरी ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में, ऐसे इंजीनियर्स की ज़रूरत है जो हार्डवेयर डिजाइन और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन दोनों को समझते हों। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियां अब चिप लेवल पर सॉल्यूशंस डेवलप करने वाले टैलेंट को प्राथमिकता दे रही हैं, जो सिर्फ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से आगे की बात है।

उभरते सेक्टर्स में करियर के मौके

यह अकादमिक बदलाव निवेशकों और बाजार पर नज़र रखने वालों के लिए भारत के विभिन्न सेक्टर्स में हो रही ग्रोथ का आईना है। सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन का लक्ष्य भारत को ग्लोबल चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है, जिससे ख़ास टैलेंट की मांग बढ़ी है। सेमीकंडक्टर्स के अलावा, यह इंटरेस्ट एम्बेडेड सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एयरोस्पेस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भी दिख रहा है। ऐसे ग्रेजुएट्स जिनके पास इंटरडिसिप्लिनरी स्किल्स हैं, यानी कंप्यूटेशनल एबिलिटीज के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता, उन्हें ऑटोमेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में लगी कंपनियों से प्लेसमेंट के अच्छे अवसर मिल रहे हैं।

औद्योगिक परिदृश्य पर असर

हालांकि कंप्यूटर साइंस एक अहम डिसिप्लिन बना हुआ है, लेकिन हार्डवेयर-सेंट्रिक रोल्स की ओर टैलेंट का बढ़ना भारत की मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली की महत्वाकांक्षाओं के लिए मज़बूती देगा। AI और हार्डवेयर डिजाइन का मेल यह बताता है कि आने वाले सालों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स में स्किल्ड लेबर की सप्लाई बढ़ सकती है। निवेशकों के लिए, इन प्रोग्राम्स से इंडस्ट्री-रेडी ग्रेजुएट्स का निकलना घरेलू मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स की लंबी अवधि की व्यवहार्यता का एक अहम संकेत है। अब देखने वाली बात यह होगी कि ये ग्रेजुएट्स वर्कफोर्स में कैसे ट्रांजिशन करते हैं और क्या सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स के तहत मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इस बदलते टैलेंट बेस को सोखने के लिए तेज़ी से स्केल कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.