एक मालिक ने अपने पुराने ड्राइवर की ₹4.25 लाख की बाईपास सर्जरी का पूरा खर्च उठाया है। इस दरियादिली की खूब चर्चा हो रही है, खासकर जब मालिक ने ड्राइवर को 'सहकर्मी' कहकर बुलाया।
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मालिक की दरियादिली, ड्राइवर की जान बची
यह दिल छू लेने वाली कहानी एक निजी अस्पताल से सामने आई है, जहां एक मालिक ने अपने लंबे समय से साथ काम कर रहे ड्राइवर की सेहत का पूरा ख्याल रखा। कार्डियक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने बताया कि उनके एक मरीज को बाईपास सर्जरी की ज़रूरत थी, जिसका अनुमानित खर्च करीब ₹4.25 लाख था। परिवार पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए पहले सरकारी अस्पताल में इलाज के विकल्प पर भी विचार किया गया था।
₹4.25 लाख की सर्जरी का पूरा भुगतान
शुरुआती बातचीत के बाद, मरीज के परिवार ने थुंगा अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया। सरकारी अस्पताल की जगह, मरीज के मालिक ने सीधे अस्पताल में ₹4.25 लाख की पूरी रकम RTGS के ज़रिए ट्रांसफर कर दी। इस भुगतान ने यह सुनिश्चित किया कि सर्जरी निजी अस्पताल में, मरीज़ की पसंद के अनुसार, तुरंत हो सके।
काम की जगह सम्मान की नई मिसाल
इस मामले की सबसे खास बात यह थी कि जब सर्जन डॉ. मिश्रा ने मालिक को उनके ड्राइवर के प्रति उदारता के लिए धन्यवाद दिया, तो मालिक ने मरीज को अपना 'सहकर्मी' कहा। उन्होंने समझाया कि 15 सालों से साथ काम करने के कारण, वे इसे मालिक-नौकर के रिश्ते के बजाय एक साझेदारी मानते हैं। उनका मानना था कि भले ही उनके रोजमर्रा के काम अलग हों, लेकिन दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में काम करने वाले 'श्रमिक' हैं।
इस घटना ने श्रमिकों के सम्मान पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। यह एक याद दिलाता है कि कैसे मालिक अपने कर्मचारियों, खासकर सहायक कर्मचारियों के स्वास्थ्य देखभाल के ज़रूरी खर्चों को उठाकर उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। भारत में कई परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवा एक बड़ा आर्थिक बोझ है। हालांकि यह एक व्यक्तिगत दयालुता का कार्य था, यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे मालिक अपने कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य परिणामों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां घरेलू या व्यक्तिगत कर्मचारियों के लिए औपचारिक कॉर्पोरेट स्वास्थ्य लाभ हमेशा उपलब्ध नहीं होते हैं।
