जुलाई में Election Commission of India के भीतर बड़ी हलचल देखी गई। दो चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) ने सीधे कैबिनेट सेक्रेटरी से संपर्क किया और मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा।
भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली में उस समय खलबली मच गई जब संस्था के भीतर की आंतरिक खींचतान सामने आई। 29 जुलाई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पदानुक्रम (hierarchy) को दरकिनार करते हुए सीधे कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखा। यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की जानकारी के बिना उठाया गया था।
विवाद की जड़ क्या थी?
मामले की शुरुआत 28 जुलाई को जारी किए गए 'वर्क-एलोकेशन' ऑर्डर से हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त इस बात से नाराज थे कि उनके काम का बंटवारा किस तरह किया गया है, विशेष रूप से चुनावी रोल के लिए इस्तेमाल होने वाले आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी को लेकर। सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय बिना पर्याप्त परामर्श के लिया गया था, जो आयोग की स्थापित परंपराओं के खिलाफ था।
आधिकारिक स्पष्टीकरण
26 सितंबर को जारी एक स्पष्टीकरण में ECI ने सफाई दी है कि यह पत्राचार केवल डेप्युटेशन पर आए एक अधिकारी के कामकाज तक सीमित था। आयोग ने जोर देकर कहा कि इस मामले का नीतिगत फैसलों या टेक्नोलॉजी डिवीजन से कोई लेना-देना नहीं है और जिस वर्क-एलोकेशन ऑर्डर पर विवाद था, उसे कभी लागू ही नहीं किया गया।
इस घटना ने नियामक संस्थाओं में प्रशासनिक स्थिरता और स्पष्ट पदानुक्रम के महत्व पर बहस छेड़ दी है। हालांकि पत्र की सटीक सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इस तरह की आंतरिक असहमति सरकार और निवेशकों के बीच चिंता का विषय बनी रहती है, क्योंकि यह संस्थानों की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सीधा असर डालती है।
