Election Commission of India ने उन राज्यों में Form 6 से अतिरिक्त घोषणा (declaration) की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है, जहाँ चुनावी रोल का रिविजन पूरा हो चुका है। अब वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 1960 के नियमों के तहत आसान हो गई है।
नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
Election Commission of India ने आधिकारिक तौर पर वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए मांगी जा रही अतिरिक्त जानकारी की शर्त को वापस ले लिया है। अब उन राज्यों में जहाँ Special Intensive Revision का काम पूरा हो चुका है, वहाँ आवेदक अब पुराने और मानक 'Form 6' के जरिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इस कदम से फॉर्म के उन अतिरिक्त कॉलम को हटा दिया गया है, जिन्हें रिविजन साइकिल के दौरान जोड़ा गया था।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह फैसला आयोग के भीतर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बाद लिया गया है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर कई बार चिंता जताई थी। उनका मानना था कि 'Registration of Electors Rules, 1960' के तहत आने वाले इस कानूनी फॉर्म को केवल प्रशासनिक आदेशों से नहीं बदला जा सकता, इसके लिए विधायी प्रक्रिया या औपचारिक संशोधन जरूरी है।
पुरानी शर्तें और मुश्किलें
पहले लागू किए गए नियमों के तहत आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी के 2000 के दशक के चुनावी रिकॉर्ड की डिटेल देनी पड़ती थी। इसमें असेंबली कॉन्स्टीट्यूएंसी नंबर, पोलिंग बूथ लोकेशन और सीरियल नंबर जैसी बारीक जानकारियां मांगी जाती थीं। इन शर्तों के कारण युवा वोटर्स और दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
अब क्या होगा?
आयोग ने ECINET पोर्टल और संबंधित अधिकारियों की वेबसाइटों से इन अतिरिक्त फील्ड्स को हटा दिया है। हालाँकि, यह राहत अभी केवल उन्हीं राज्यों के लिए है जहाँ चुनावी रोल का काम पूरा हो चुका है। जिन क्षेत्रों में 'Special Intensive Revision' का काम अभी चल रहा है, वहाँ पहले की तरह अतिरिक्त घोषणाएं जारी रहेंगी।
