Election Commission of India (ECI) ने 5 राज्यों में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' के जरिए मतदाता सूची में बड़ा बदलाव किया है। इस प्रक्रिया में कुल **12.2%** मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे वोटर्स की संख्या में **2.29 करोड़** की कमी आई है।
आंकड़ों पर एक नज़र
चुनाव आयोग की इस कवायद के बाद पांच राज्यों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 18.71 करोड़ से घटकर 16.43 करोड़ रह गई है। इस प्रशासनिक सफाई का मुख्य उद्देश्य मृत लोगों, स्थान परिवर्तन करने वाले नागरिकों और डुप्लीकेट नामों को हटाकर सूची को सटीक बनाना था। इसमें 'Representation of the People Act, 1950' के तहत कार्रवाई की गई है।
किस राज्य में कितना असर?
- उत्तर प्रदेश: कुल कटौती का लगभग 90% हिस्सा यहीं से है। राज्य में वोटर्स की संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 13.40 करोड़ रह गई है, जो कि 13.24% की गिरावट है।
- अन्य राज्य: उत्तराखंड में 10.07%, गोवा में 10.76%, पंजाब में 6.34% और मणिपुर में 6.33% की कमी दर्ज की गई है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह विशुद्ध रूप से एक सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसका किसी भी लिस्टेड कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, डेट लेवल या शेयर बाजार के सेंटीमेंट से कोई लेना-देना नहीं है। चुनाव आयोग का यह कदम केवल चुनावी पारदर्शिता के लिए है और इसका स्टॉक मार्केट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
