Election Commission of India ने पीलीभीत में 10,000 से ज्यादा फर्जी वोटर एंट्री पकड़े जाने के बाद दो Electoral Registration Officers को सस्पेंड कर दिया है। ECINET पोर्टल के गलत इस्तेमाल के बाद अब पूरे राज्य में सुरक्षा ऑडिट के आदेश दिए गए हैं।
पोर्टल का दुरुपयोग और जवाबदेही
जांच में खुलासा हुआ है कि 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच बिना किसी जरूरी दस्तावेज के 10,470 वोटर एंट्री मंजूर कर दी गईं। यह सारा खेल ECINET पोर्टल के लॉग-इन क्रेडेंशियल्स के गलत इस्तेमाल से हुआ, जो कंप्यूटर असिस्टेंट्स को दिए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, एक आउटसोर्स ऑपरेटर ने इस दौरान 13,779 फॉर्म-8 आवेदनों को बिना वेरिफिकेशन के प्रोसेस कर दिया, जो डेटाबेस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने अब मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 198 को भी FIR में शामिल किया है। सस्पेंड किए गए अधिकारियों मयंक गोस्वामी, हेमंत चौधरी और ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
पूरे राज्य में होगा सुरक्षा ऑडिट
पीलीभीत की घटना के बाद उत्तर प्रदेश के चीफ Electoral Officer नवदीप रिणवा ने पूरे राज्य में मतदाता पंजीकरण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ऑडिट के निर्देश दिए हैं। अब सभी जिलों में कंप्यूटर असिस्टेंट्स के लॉग-इन आईडी को डिएक्टिवेट कर दिया गया है ताकि डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
आयोग अब हाल ही में जोड़ी गई सभी वोटर एंट्रीज का फिजिकल वेरिफिकेशन कर रहा है। इसका मकसद डेटा की शुद्धता बनाए रखना और किसी भी प्रशासनिक या राजनीतिक अनियमितता के जोखिम को खत्म करना है। आयोग का साफ संदेश है कि डिजिटल कामों में अब और अधिक सख्त निगरानी रखी जाएगी।
