Election Commission of India ने **13 करोड़** मतदाताओं के नाम कटने के विवादों के बाद वार्षिक 'स्पेशल समरी रिवीजन' प्रक्रिया को फिर से शुरू कर दिया है। पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए अब राजनीतिक दलों को मशीन-रीडेबल डिजिटल इलेक्टोरल रोल उपलब्ध कराए जाएंगे।
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने वोटर एनरोलमेंट नीति में बड़ा बदलाव करते हुए वार्षिक 'स्पेशल समरी रिवीजन' एक्सरसाइज को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। यह कदम हालिया 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' के बाद उपजे भारी जन आक्रोश और राजनीतिक चिंताओं के बीच उठाया गया है, जिसमें कथित तौर पर करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हो गए थे। आयोग का मुख्य लक्ष्य अब 2024-2025 चुनावी अवधि के लिए नए पात्र नागरिकों को शामिल करना और डेटाबेस की खामियों को दूर करना है।
पारदर्शिता और डिजिटल डेटा एक्सेस
रिवीजन साइकिल के अलावा, आयोग ने अपनी डेटा एक्सेस नीति में भी बड़ा बदलाव किया है। अब राजनीतिक दलों को मशीन-रीडेबल डिजिटल इलेक्टोरल रोल (PDF फॉर्मेट में) दिए जाएंगे। यह पहले के उस रुख से उलट है, जिसमें गोपनीयता और सुरक्षा का हवाला देते हुए केवल इमेज-ओनली स्कैन डॉक्यूमेंट्स ही उपलब्ध कराए जाते थे।
राजनीतिक दबाव और कानूनी इतिहास
कांग्रेस (Congress) और NCP (SP) जैसे दलों का तर्क था कि नॉन-सर्चबल फाइलों की वजह से डेटा को वेरीफाई करना और गलतियों या डुप्लीकेट एंट्रीज को पहचानना नामुमकिन था। यह फैसला 2018 की उस कानूनी बहस से जुड़ता है, जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नॉन-सर्चबल डेटाबेस की सीमाओं को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं। हालांकि आयोग ने पारदर्शिता की दिशा में कदम उठाया है, लेकिन उन 13 करोड़ मतदाताओं की स्थिति को लेकर अब भी राजनीतिक हलकों में सवाल बरकरार हैं जो शुरुआती रिवीजन के दौरान बाहर कर दिए गए थे।
