Election Commission of India (ECI) ने उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से नाम हटाने वाले फॉर्म्स में धांधली की बात स्वीकार की है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी अनियमितता की औपचारिक जांच के निर्देश दिए हैं।
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में वोटर रिवीजन प्रोसेस के दौरान धोखाधड़ी वाले 'Form 7' आवेदनों का पता चलने की पुष्टि की है। बता दें कि 'Form 7' का उपयोग आधिकारिक तौर पर वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के लिए किया जाता है। यह मामला तब सामने आया जब चुनावी डेटा की सुरक्षा और वोटर लिस्ट में अनधिकृत बदलावों को लेकर सवाल उठाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देते हुए निर्वाचन आयोग को विस्तृत जांच करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई सांसद तनुज पुनिया द्वारा दायर की गई याचिका के बाद की गई है, जिसमें राज्य के चुनावी रिकॉर्ड में सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग से विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
अनियमितताओं के सबूत और आयोग की सफाई
राज्य के विभिन्न हिस्सों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। हाटा विधानसभा क्षेत्र में 32 प्री-फिल्ड फॉर्म लावारिस मिले, जबकि खलीलाबाद में नियमों का उल्लंघन करने वाले आवेदनों के बड़े जखीरे को खारिज किया गया। सकलडीहा में तो स्थानीय अधिकारियों के घरों से अनधिकृत फॉर्म बरामद किए गए।
आयोग का कहना है कि उनके आंतरिक सुरक्षा तंत्र ने समय रहते इन फर्जी आवेदनों को पकड़ लिया था और डेटाबेस में एंट्री होने से पहले ही इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा कि वे 'Representation of the People Act' के तहत काम कर रहे हैं और शिकायतों के बाद डिजिटलीकरण पर तुरंत रोक लगा दी गई थी।
आगामी चुनाव पर असर
यूपी में 2026-27 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए वोटर लिस्ट की सटीकता एक अहम मुद्दा बन गई है। फिलहाल राज्य में कुल 13.39 करोड़ मतदाता हैं, जिसमें हालिया रिवीजन के दौरान 8.4 मिलियन की बढ़ोतरी हुई है। अब सभी की नजरें आयोग द्वारा की जाने वाली जांच और वोटर रिकॉर्ड्स की सत्यता पर टिकी हैं।
