महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और उनके 13 सांसदों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस मीटिंग का मकसद केंद्र की कैबिनेट में मंत्री पद हासिल करना है। यह मुलाकात शिंदे गुट की लोकसभा में बढ़ी ताकत के बाद हुई है, जिसमें हाल ही में छह नए सदस्य जुड़े थे।
दिल्ली में शिंदे गुट की अहम बैठक
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने 13 लोकसभा सांसदों के साथ बुधवार को दिल्ली में थे। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक में मुख्य रूप से केंद्र सरकार की कैबिनेट में होने वाले विस्तार और शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को मंत्री पद मिलने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। महाराष्ट्र की राजनीति और व्यापार जगत पर नजर रखने वालों के लिए यह मुलाकात अहम है, क्योंकि यह दिखाता है कि शिंदे गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
लोकसभा में बढ़ी शिंदे गुट की ताकत
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब शिंदे गुट की संसदीय ताकत में इजाफा हुआ है। हाल ही में छह लोकसभा सांसदों, जिनमें संजय दीना पाटिल भी शामिल थे, ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थामा है। इस वजह से, पार्टी दल-बदल विरोधी कानूनों के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पार करने में कामयाब रही। अब शिंदे गुट के पास लोकसभा में कुल 13 सीटें हैं। इससे महाराष्ट्र के हितों और राज्य के लिए केंद्रीय सहायता की वकालत करने में उनकी स्थिति और मजबूत हुई है।
केंद्र-राज्य समन्वय पर असर
सूत्रों के अनुसार, गृहमंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को उनके निर्वाचन क्षेत्रों के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स में समर्थन का आश्वासन दिया। साथ ही, लंबित प्रशासनिक मामलों को सुलझाने पर भी चर्चा हुई। लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे को इस गुट के विधायकों और केंद्र सरकार के बीच समन्वय का जिम्मा सौंपा गया है। इसका उद्देश्य उन नीतिगत मुद्दों को तेजी से हल करना है जो अक्सर क्षेत्रीय औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्रभावित करते हैं।
संभावित कैबिनेट प्रतिनिधित्व
आगामी केंद्रीय कैबिनेट फेरबदल को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिंदे गुट का लक्ष्य एक कैबिनेट पोर्टफोलियो और एक या दो राज्य मंत्री पद हासिल करना है। श्रीकांत शिंदे का नाम अक्सर मंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर लिया जा रहा है। केंद्र सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने से राज्य की परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की गति, राज्य की पहलों के लिए धन का आवंटन और महाराष्ट्र के क्षेत्रीय विकास लक्ष्यों के साथ संघीय नीतियों का तालमेल प्रभावित हो सकता है।
निवेशक और बाजार प्रतिभागी अक्सर ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों पर नज़र रखते हैं, क्योंकि ये परियोजना कार्यान्वयन की गति और विकास कार्यक्रमों की निरंतरता में बदलाव ला सकते हैं। अगली महत्वपूर्ण बात यह होगी कि केंद्रीय कैबिनेट विस्तार की आधिकारिक घोषणा कब होती है और क्या शिंदे गुट को उम्मीद के मुताबिक मंत्री पद मिलते हैं, जिससे केंद्र की नीति-निर्माण में उनका प्रभाव और मजबूत होगा।
