मुनाफे में Asian Paints, घाटे में IndiGo
Q4 FY26 के नतीजों ने बाज़ार को दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई हैं। एक तरफ, Asian Paints ने अपनी डेकोरेटिव सेगमेंट में जबरदस्त मांग के दम पर नेट प्रॉफिट में 69% का उछाल दर्ज किया है। कंपनी का मुनाफा बढ़कर ₹1,172 करोड़ पर पहुंच गया है।
वहीं, विमानन कंपनी IndiGo के लिए यह तिमाही बहुत खराब रही। भारी-भरकम फॉरेन एक्सचेंज (Forex) नुकसान के चलते कंपनी को ₹2,536 करोड़ का बड़ा तिमाही घाटा हुआ है। हालांकि, कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में मामूली 1% की बढ़त दर्ज की गई।
एशियन पेंट्स की सफलता का राज
Asian Paints की सफलता का मुख्य कारण इसके डोमेस्टिक डेकोरेटिव बिज़नेस में 12.4% की वॉल्यूम ग्रोथ रही। इससे पता चलता है कि शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में मांग काफी मजबूत है। इतना ही नहीं, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी ने अपने EBITDA मार्जिन को 19.4% तक बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है।
इंडिगो पर Forex का कहर
IndiGo को इस तिमाही में ₹4,823 करोड़ का फॉरेन एक्सचेंज पर नुकसान उठाना पड़ा। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ₹3,068 करोड़ का मुनाफा कमा रही थी। यह बड़ा अंतर दिखाता है कि एयरलाइंस जैसी कैपिटल-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज, एक्सचेंज रेट के उतार-चढ़ाव और एनर्जी की कीमतों के आगे कितनी बेबस हैं।
रिलायंस कम्युनिकेशंस का बुरा हाल
इस बीच, रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) की हालत और भी खराब है। कंपनी अभी भी कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (Corporate Insolvency Resolution Process) के चंगुल में फंसी हुई है। कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन नेगेटिव में हैं और सीबीआई (CBI) द्वारा पुराने बोर्ड मिनट्स की ज़ब्ती और एसेट अटैचमेंट को लेकर लगातार जांच चल रही है। ऐसे में, शेयर की कीमत ₹1 के नीचे अटकी हुई है और संस्थागत निवेशकों का समर्थन भी नहीं मिल पा रहा है।
आगे क्या?
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि अभी कॉर्पोरेट हेल्थ में 'K-शेप' रिकवरी का पैटर्न देखने को मिल रहा है। Asian Paints अपनी लगातार डिविडेंड पेआउट और मार्जिन बढ़ाने की क्षमता के चलते महंगी बनी हुई है। दूसरी ओर, एविएशन सेक्टर की रिकवरी रुपए के स्थिर होने और फ्यूल की कीमतों में नरमी पर निर्भर करती है।
