Carnelian Fund Manager की राय: अब कमाई पर टिकी रहेंगी शेयर बाजार की तेजी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Carnelian Fund Manager की राय: अब कमाई पर टिकी रहेंगी शेयर बाजार की तेजी!

Carnelian Asset Management का कहना है कि अब भारतीय शेयर बाजार में सिर्फ वैल्यूएशन बढ़ने से तेजी नहीं आएगी। आने वाले समय में कंपनियों के असली 'मुनाफे' (Earnings) ही शेयरों को ऊपर ले जाएंगे। ऐसे में निवेशकों को उन कंपनियों पर दांव लगाना चाहिए जो बेहतर सुशासन (Governance) और ग्रोथ दिखा रही हैं, न कि किसी भी सेक्टर पर आंख बंद करके भरोसा करना चाहिए।

बाजार की नई चाल

Carnelian Asset Management & Advisors के फंड मैनेजर, कुणाल शाह, का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार इस वक्त पिछले कुछ तिमाहियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। कमोडिटी की कीमतों में नरमी, घरेलू बाजार में अच्छी लिक्विडिटी और लगातार बढ़ रही क्रेडिट ग्रोथ इसका समर्थन कर रहे हैं।

लेकिन, अब वो दौर खत्म हो रहा है जब सिर्फ शेयर के वैल्यूएशन बढ़ने से ही बाजार में बड़ी तेजी आ जाती थी। अब निवेशकों को असली कमाई, यानी कंपनियों के 'मुनाफे' (Earnings) पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

FY27 के लिए मुनाफे का अनुमान

शुरुआती संकेत बताते हैं कि फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल जैसे बड़े सेक्टर्स में कारोबार का माहौल अच्छा है। उम्मीद की जा रही है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) पिछले साल के मुकाबले कमाई के मामले में और भी बेहतर साबित हो सकता है। ब्याज दरों में संभावित कमी, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और कंजम्पशन में लगातार रिकवरी जैसी चीजें इस उम्मीद को पंख लगा रही हैं।

कंजम्पशन और IT सेक्टर में बदलाव

FMCG सेक्टर में मुकाबला और भी कड़ा होता जा रहा है। बड़ी कंपनियों पर डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स, डिजिटल कंपनियों और रीजनल प्लेयर्स का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में, निवेशकों को इस सेक्टर को एक नजरिए से देखने के बजाय उन कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए जो बदलती कंजम्पशन पैटर्न के साथ तालमेल बिठा पा रही हैं।

इसी तरह, IT सेक्टर में वैल्यूएशन करेक्शन के बाद शेयर की कीमतें थोड़ी वाजिब हुई हैं। लेकिन, यहां भी फोकस उन कंपनियों पर है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सही इस्तेमाल कर पा रही हैं। जैसे इंटरनेट और क्लाउड कंप्यूटिंग ने पहले कारोबार को बदला था, वैसे ही AI भी एक बड़ा फैक्टर बनने वाला है। इसलिए, पूरे सेक्टर पर दांव लगाने के बजाय AI में लीड करने वाली कंपनियों को चुनना समझदारी होगी।

कैपिटल मार्केट्स और ग्लोबल नज़रिया

आने वाले समय में, IPO और QIP के जरिए फंड जुटाने का सिलसिला कैलेंडर ईयर तक जारी रहने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि कई कंपनियां विस्तार के लिए पैसा जुटा रही हैं, लेकिन बाजार अब ज्यादा सेलेक्टिव हो गया है। निवेशक अब कंपनियों के सुशासन, वित्तीय सेहत और कमाई की विजिबिलिटी को लेकर ज्यादा गंभीर हो गए हैं।

वैश्विक स्तर पर, जब दूसरे देशों में ग्रोथ धीमी पड़ रही है, भारत इमर्जिंग मार्केट में एक अहम डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और एनर्जी जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ने का फायदा मिलेगा, लेकिन निवेशकों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे साफ कॉम्पिटिटिव एडवांटेज और वाजिब कीमतों वाली कंपनियों को चुन पाते हैं, न कि सिर्फ फॉरेन इंस्टीट्यूशनल कैपिटल के फ्लो को फॉलो करते हैं।

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