कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने **34 करोड़** से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स के लिए **EPF Scheme 2026** लॉन्च कर दी है। यह स्कीम 1952 के नियमों को बदल देगी, जिसमें आंशिक निकासी (partial withdrawal) के लिए न्यूनतम **25%** बैलेंस रखना ज़रूरी होगा। साथ ही, नॉमिनी को **₹1 लाख** तक का नया बीमा लाभ और दावों के निपटान के लिए **20 दिन** की नई समय-सीमा तय की गई है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने EPF Scheme 2026 का ऐलान कर दिया है। यह दशकों पुराने 1952 के नियमों की जगह लेगा और 34 करोड़ से अधिक सदस्यों को प्रभावित करेगा। इस नई स्कीम का मकसद डिजिटल इंटीग्रेशन के ज़रिए सर्विस डिलीवरी को आधुनिक बनाना और फंड मैनेजमेंट में जवाबदेही बढ़ाना है।
आंशिक निकासी और मिनिमम बैलेंस में बदलाव
नई स्कीम का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब आंशिक निकासी (partial withdrawal) के लिए सब्सक्राइबर्स को अपने EPF खाते में कुल जमा राशि का कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना होगा। इसका मतलब है कि रिटायरमेंट से पहले पूरी रकम निकालना अब इतना आसान नहीं होगा।
निकासी को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है: ज़रूरी ज़रूरतें, घर से जुड़े खर्च और विशेष परिस्थितियां। शिक्षा, शादी या होम लोन जैसे कामों के लिए आंशिक निकासी की अनुमति तो होगी, लेकिन इसकी फ्रीक्वेंसी (frequency) पर नई सीमाएं लागू होंगी। उदाहरण के लिए, शिक्षा के लिए 10 बार और घर या शादी के लिए 5 बार ही निकासी हो पाएगी। साथ ही, ज़्यादातर आंशिक निकासी के लिए अब 12 महीने की सदस्यता ज़रूरी होगी, जो पुराने नियमों की जटिलताओं को खत्म करेगा।
बेरोजगारी और पेंशन की समय-सीमा
नौकरी छूटने की स्थिति में पीएफ निकासी के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब फुल विथड्रॉल (full withdrawal) के लिए पहले के 2 महीने के बजाय 12 महीने का इंतज़ार करना होगा। इसी तरह, एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) के तहत निकासी के लिए 24 महीने के बजाय 36 महीने का इंतज़ार करना पड़ेगा।
नई बीमा राशि और जवाबदेही
परिवारों को ज़्यादा सुरक्षा देने के लिए, नई EDLI Scheme 2026 के तहत मरे हुए सदस्यों के नॉमिनी को ₹50,000 से लेकर ₹1 लाख तक का बीमा लाभ मिलेगा। यह राशि कर्मचारी के औसत बैलेंस के आधार पर तय होगी। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए, अब सभी नॉमिनेशन EPFO पोर्टल पर डिजिटल तरीके से करने होंगे, जिससे पुराने कागज़ी सिस्टम को ख़त्म कर दिया जाएगा।
दावों के निपटान (claim settlement) को लेकर जवाबदेही भी बढ़ाई गई है। EPFO ने पीएफ दावों के निपटान के लिए 20 दिन की समय-सीमा तय की है। अगर इस अवधि में दावा निपटारा नहीं होता है, तो संबंधित रीजनल पीएफ कमिश्नर पर 12% का पेनाल्टी इंटरेस्ट (penal interest) लग सकता है।
भविष्य के योगदान पर असर
बुनियादी योगदान (contribution) का स्ट्रक्चर वही रहेगा, यानी कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपनी बेसिक सैलरी का 12% योगदान करते रहेंगे। हालांकि, वेतन सीमा (wage ceiling) को लेकर नई स्कीम ज़्यादा लचीली है। स्कीम में सीधे ₹15,000 की सीमा का उल्लेख न करके, सरकार अब आधिकारिक नोटिफिकेशन के ज़रिए इस सीमा को बदल सकती है। इससे आर्थिक हालातों के हिसाब से ज़रूरी बदलाव तेज़ी से किए जा सकेंगे। सब्सक्राइबर्स को आगे सरकार की ओर से आने वाले नोटिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि वे अनिवार्य योगदान की गणना को प्रभावित कर सकते हैं।
