कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपना यूनिफाइड मेंबर पोर्टल लॉन्च कर दिया है, जिसे EPFO 2.0 नाम दिया गया है। इस नए सिस्टम से नौकरी बदलने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए PF बैलेंस का ट्रांसफर अब आधार से लिंक UAN के ज़रिए ऑटोमैटिक हो जाएगा। इससे पहले की तरह मैनुअल रिक्वेस्ट और एम्प्लॉयर अप्रूवल की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
EPFO 2.0: अब PF ट्रांसफर के लिए नहीं लगेगी लंबी लाइन!
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों के लिए एक बड़ी खुशखबरी दी है। संगठन ने अपना यूनिफाइड मेंबर पोर्टल लॉन्च किया है, जिसे EPFO 2.0 कहा जा रहा है। यह एक बड़ा डिजिटल अपग्रेड है जिसका मकसद 34 करोड़ से ज़्यादा सदस्यों को बेहतर सर्विस देना और दावों (claims) के निपटारे में आने वाली दिक्कतों को ख़त्म करना है।
नौकरी बदलने वालों की बल्ले-बल्ले: ऑटोमैटिक PF ट्रांसफर
इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है प्रोविडेंट फंड (PF) बैलेंस ट्रांसफर का ऑटोमेशन। पहले जब कोई कर्मचारी नौकरी बदलता था, तो उसे पुराने PF अकाउंट से नए अकाउंट में बैलेंस ट्रांसफर करने के लिए मैनुअल रिक्वेस्ट भेजनी पड़ती थी और पुराने व नए नियोक्ता (employer) दोनों से अप्रूवल का इंतज़ार करना पड़ता था। इसमें काफी समय लगता था और गलतियों की भी गुंजाइश रहती थी।
लेकिन अब EPFO 2.0 में, अगर आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) आधार से लिंक और वेरिफाइड है, तो आपके पुराने PF अकाउंट का बैलेंस अपने आप आपके नए EPF अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा। इससे मैनुअल एम्प्लॉयर वेरिफिकेशन की ज़रूरत ख़त्म हो गई है और आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित और एक जगह जमा रहेगी।
'सर्विस हिस्ट्री' से सब कुछ एक जगह
ऑटोमैटिक ट्रांसफर के साथ-साथ, नए पोर्टल में 'सर्विस हिस्ट्री' (Service History) नाम का एक नया फीचर भी जोड़ा गया है। यह टूल आपके UAN से जुड़ी पूरी करियर की जानकारी का एक डिजिटल रिकॉर्ड देगा। इसमें आपकी नौकरी की तारीखें, कब से कब तक काम किया, और EPF व पेंशन स्कीम (EPS) में किए गए योगदान का पूरा हिसाब होगा।
इस जानकारी को एक जगह रखने से कर्मचारियों के लिए अपने रिकॉर्ड्स को वेरिफाई करना और किसी भी गड़बड़ी को पकड़ना आसान हो जाएगा। EPFO के लिए भी यह एक बड़ा कदम है, क्योंकि इससे दावों का निपटारा तेज़ी से होगा और देश भर में कहीं से भी खातों को मैनेज किया जा सकेगा, जिससे पुराने रीजनल ऑफिस के चक्कर लगाने की ज़रूरत कम होगी।
इनऑपरेटिव खातों का झंझट ख़त्म?
यह कदम मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट के उन खातों को कम करने के प्रयासों का हिस्सा है जो इस्तेमाल में नहीं हैं (inoperative accounts)। अप्रैल 2026 में, EPFO ने E-PRAAPTI प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया था, जो सदस्यों को अपने पुराने, भूले हुए खातों को वर्तमान UAN से जोड़ने में मदद करता है।
अक्सर जब कोई सदस्य नौकरी बदलता है और अपने PF का बैलेंस ट्रांसफर या विड्रॉ नहीं करता, तो उसका अकाउंट इनऑपरेटिव हो जाता है। ऐसे मामलों में भी, अगर सदस्य 58 साल की उम्र तक योग्य रहता है, तो उसके फंड पर ब्याज जुड़ता रहता है। EPFO 2.0 पोर्टल और E-PRAAPTI पहल मिलकर भारतीय कर्मचारियों के लिए एक स्मूथ, डिजिटल अनुभव की ओर इशारा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि यह ऑटोमैटिक ट्रांसफर सिस्टम देश भर में होने वाले लाखों जॉब ट्रांज़िशन को कितनी तेज़ी और सफलतापूर्वक संभाल पाता है।
