EPFO का बड़ा कदम: 25 जुलाई से PF पाना होगा आसान, विड्रॉल के नियम भी होंगे सरल

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AuthorAditya Rao|Published at:
EPFO का बड़ा कदम: 25 जुलाई से PF पाना होगा आसान, विड्रॉल के नियम भी होंगे सरल

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) 25 जुलाई को अपने सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की मीटिंग में CITES प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकता है। इस प्रोजेक्ट का मकसद 7.8 करोड़ से ज्यादा मेंबर्स के लिए PF ट्रांसफर और विड्रॉल को ऑटोमेटेड और आसान बनाना है।

PF निकासी और ट्रांसफर होंगे आसान

EPFO अपने ग्राहकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। 25 जुलाई को होने वाली सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की मीटिंग में Centralised IT Enabled Services (CITES) प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है। इस नए सिस्टम से 7 करोड़ से ज्यादा एक्टिव सब्सक्राइबर्स और 80 लाख से ज्यादा पेंशनर्स के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़े काम बेहद आसान हो जाएंगे।

फिलहाल, पीएफ से आंशिक निकासी (partial withdrawal) के लिए काफी कागजी कार्रवाई और जटिल नियमों से गुजरना पड़ता है। CITES प्रोजेक्ट के तहत, 13 तरह के मौजूदा नियमों को घटाकर सिर्फ 3 कैटेगरी में लाया जाएगा। ये कैटेगरी होंगी - ज़रूरी खर्चे, घर खरीदने या बनाने के लिए और खास परिस्थितियां। इन नियमों के तहत, अगर सदस्य योग्य पाए जाते हैं तो वे अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकेंगे।

नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया भी अब तेज होगी। अभी ट्रांसफर के लिए पुराने और नए नियोक्ता (employer) दोनों की मंजूरी और EPFO ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिसमें देरी होती थी। नए ऑटोमेटेड सिस्टम से यह प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी और पीएफ ट्रांसफर में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल एफिशिएंसी

EPFO के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन है। सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म पर आने से डेटा की सटीकता बढ़ेगी और क्लेम सेटलमेंट में लगने वाला समय कम होगा। इससे पहले, मैनुअल वेरिफिकेशन के कारण EPFO को बड़ी संख्या में पेंडिंग क्लेम से जूझना पड़ता था। CITES के सफल इम्प्लीमेंटेशन से रीजनल ऑफिस पर काम का बोझ कम होगा और सब्सक्राइबर्स को बेहतर अनुभव मिलेगा।

यह डेवलपमेंट निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि EPFO भारतीय शेयर बाजार में बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक है। EPFO की एफिशिएंसी और फंड मैनेजमेंट में सुधार से यह तय हो सकता है कि विभिन्न एसेट क्लास, जैसे इक्विटी और डेट में फंड का इनफ्लो कैसे होता है। अब सभी की निगाहें 25 जुलाई की मीटिंग पर टिकी हैं।

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