कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एक्सटेंडिड प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट्स को बड़ी राहत देते हुए एक 'वन-टाइम अम्नेस्टी स्कीम' (One-Time Amnesty Scheme) लॉन्च की है। यह स्कीम 29 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी और उन ट्रस्ट्स को अपना लीगल स्टेटस रेगुलराइज़ करने का मौका देगी, जिनके पास सरकार की तरफ से ज़रूरी एग्ज़ेम्पशन नोटिफिकेशन नहीं था।
लीगल स्टेटस को रेगुलराइज़ करने का मौका
EPFO ने हाल ही में एक ख़ास पहल की है, जिसके तहत कई एस्टैब्लिशमेंट्स को अपने प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट्स के स्टेटस से जुड़ी पुरानी समस्याओं को सुलझाने का छह महीने का मौका मिलेगा। इस 'अम्नेस्टी स्कीम, 2026' का मुख्य मकसद उन ट्रस्ट्स की मदद करना है जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत काम तो कर रहे थे, लेकिन उन्हें सरकार से ज़रूरी एग्ज़ेम्पशन नोटिफिकेशन नहीं मिल पाया था।
एग्ज़ेम्प्टेड PF ट्रस्ट्स पर असर
कई प्राइवेट कंपनियाँ अपने PF ट्रस्ट्स खुद मैनेज करती हैं। कुछ ऐसी भी हैं जो सालों से बिना सरकारी मंज़ूरी के चल रही हैं। ऐसे में, उनके लीगल स्टेटस को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, खासकर तब जब सरकार सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 की ओर बढ़ रही है। यह स्कीम इन संस्थाओं को बिना किसी पेनाल्टी के अपना स्टेटस ठीक करने का रास्ता दिखाती है।
अप्लाई कैसे करें और ऑडिट की ज़रूरतें
जो एंप्लॉयर्स इस स्कीम के लिए एलिजिबल हैं, उन्हें अपने लोकल EPFO रीजनल ऑफिस में अप्लाई करना होगा या दिए गए ईमेल एड्रेस पर संपर्क करना होगा। इस प्रक्रिया में फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी बहुत ज़रूरी है। अप्लाई करने वालों को चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountant) द्वारा तैयार किए गए ऑडिटेड फाइनेंशियल अकाउंट्स जमा करने होंगे। अगर EPFO को स्पेशल कंप्लायंस ऑडिट की ज़रूरत पड़ती है, तो वह भी अप्लाई करने के 3 महीने के अंदर पूरा करना होगा। इस ऑडिट का मकसद यह पक्का करना है कि एंप्लॉईज़ के हितों की पूरी तरह से रक्षा हो।
कौन सी कैटेगरी चुनें?
एलिजिबल एंटिटीज़ को दो मुख्य कैटेगरीज़ में बांटा गया है:
- कैटेगरी I: ये वो एस्टैब्लिशमेंट्स हैं जो अपने स्टेटस को रेट्रोस्पेक्टिवली (retrospectively) रेगुलराइज़ करना चाहते हैं, लेकिन भविष्य में अन-एग्ज़ेम्प्टेड (un-exempted) एंटिटी के तौर पर काम करना पसंद करेंगे। यानी, वे स्टैंडर्ड EPFO सिस्टम में ट्रांज़िशन करेंगे।
- कैटेगरी II: ये वो हैं जो नए सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत अपने एग्ज़ेम्प्टेड ट्रस्ट्स को मैनेज करना जारी रखना चाहते हैं।
इस तरह, कंपनियाँ अपनी लॉन्ग-टर्म कंप्लायंस स्ट्रेटेजी तय कर सकती हैं।
स्टेकहोल्डर्स के लिए क्यों ज़रूरी है?
यह स्कीम फाइनेंस एक्ट, 2026 के नए बदलावों के अनुरूप है, जिसका मकसद इनकम टैक्स फ्रेमवर्क को एंप्लॉईज़ प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविज़न्स एक्ट, 1952 के साथ सिंक करना है। कंपनियों के लिए, यह विंडो फ्यूचर लिटिगेशन या अचानक रेगुलेटरी एक्शन के रिस्क को कम करती है। स्टेटस गैप को एड्रेस न करने पर लीगल चैलेंज या फंड मैनेजमेंट में रुकावट आ सकती है। इन्वेस्टर्स के लिए, जो कंपनियाँ इस स्कीम को अपना रही हैं, वे अपने रेगुलेटरी रिस्क को प्रोएक्टिवली मैनेज कर रही हैं, जिससे लॉन्ग-टर्म गवर्नेंस और कंप्लायंस स्टेबिलिटी बढ़ सकती है। अप्लाई करने की आखिरी तारीख 29 दिसंबर 2026 है, जो नोटिफिकेशन की तारीख से 6 महीने बाद होगी।
