ECI Portal Update: अब एप्लीकेंट्स को देनी होगी पारिवारिक वोटर की जानकारी, लाखों नाम हटने के बाद उठे सवाल

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AuthorAditya Rao|Published at:
ECI Portal Update: अब एप्लीकेंट्स को देनी होगी पारिवारिक वोटर की जानकारी, लाखों नाम हटने के बाद उठे सवाल

चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने अपने ECINET पोर्टल पर नया नियम लागू किया है। अब नए वोटर अप्लाई करने वालों को अपने माता-पिता या परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य की वोटर स्टेटस की जानकारी देनी होगी। यह बदलाव हाल ही में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद आया है, जिसमें लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

ECI का नया नियम: क्या है पूरी बात?

चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने अपने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल, ECINET, में एक बड़ा बदलाव किया है। अब नए वोटर अप्लाई करने वाले एप्लीकेंट्स को अपने माता-पिता या परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य की वोटर स्टेटस की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। यह बदलाव हाल ही में पूरे देश में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद आया है। इस रिवीजन में वोटर लिस्ट को वेरीफाई और अपडेट किया गया था।

लाखों नाम हटने से बढ़ी चिंता

यह नया नियम ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया के तहत 5.58 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर नामों के हटने से नागरिक समाज और एप्लीकेंट्स के बीच चिंता बढ़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि नाम हटाने के लिए क्या मापदंड अपनाए गए और क्या नए एप्लीकेंट्स, जिनके परिवार के सदस्यों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें फॉर्म भरने में दिक्कत होगी।

पश्चिम बंगाल और बिहार में भी उठा मुद्दा

पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाखों वोटर्स को रजिस्ट्रेशन स्टेटस को लेकर समस्याएं आईं, और कई मामलों में तो ज्यूडिशियल ट्रिब्यूनल्स के दखल की भी जरूरत पड़ी। इन देरी से उन लोगों के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है जिनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए थे। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसी जगहों पर राज्य सरकारों के बीच इस बात पर भी चर्चा हुई है कि क्या वोटर लिस्ट का स्टेटस कुछ सरकारी सामाजिक कल्याण योजनाओं की पात्रता से जुड़ा हो सकता है।

पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल

ECINET पोर्टल पर माता-पिता के वोटर स्टेटस की नई अनिवार्यता ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आलोचक और कानूनी विशेषज्ञ इस अपडेट की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे बदलाव, जो मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं, उन्हें आम तौर पर एक व्यवस्थित सार्वजनिक चर्चा या स्पष्ट विधायी अधिसूचना की आवश्यकता होती है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि यह नई अनिवार्य जानकारी उन एप्लीकेंट्स को स्वतः बाहर कर सकती है जिनके परिवार के सदस्यों के नाम SIR के दौरान हटाए गए थे।

आगे क्या?

जो लोग रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, उनके लिए मुख्य बात यह होगी कि आयोग उन एप्लीकेंट्स को कैसे हैंडल करता है जिनके माता-पिता का वोटर स्टेटस उपलब्ध नहीं है, या जिनके नामों को हालिया रिवीजन के दौरान हटा दिया गया था। नागरिक और निवेशक चुनाव आयोग से इस डेटा फील्ड के उद्देश्य और क्या इसका इस्तेमाल नए वोटर एप्लीकेंट्स को अप्रूव करने के लिए एक फिल्टर के तौर पर किया जाएगा, इस पर स्पष्टीकरण के लिए भविष्य के अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं।

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