पश्चिम बंगाल में चुनावी धांधली की चिंताओं के बीच Election Commission ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य में **37 लाख** से ज्यादा चुनावी रोल अपीलें अभी भी लंबित पड़ी हैं।
भारी बैकलॉग से जुड़ी चुनौती
Election Commission of India ने सुप्रीम कोर्ट में जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। राज्य में मतदाता सूची (voter roll) के संशोधन से जुड़ी कुल 38,20,683 आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिनमें से केवल 1,02,231 मामलों का ही अब तक निपटारा हो सका है। बाकी की 37,18,452 अपीलें अभी भी लंबित हैं, जिससे प्रशासनिक देरी पर सवाल उठ रहे हैं।
क्यों विफल हुआ तंत्र?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) के दौरान बड़ी संख्या में शिकायतों को सुलझाने के लिए 19 विशेष ट्रिब्यूनल बनाए गए थे। इन पैनलों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के रिटायर्ड जज और न्यायिक अधिकारी शामिल थे। हालांकि, मौजूदा डेटा साफ बताता है कि इतनी बड़ी संख्या में आ रहे मामलों को संभालने के लिए यह व्यवस्था नाकाफी साबित हुई है।
कोर्ट का रुख और याचिका
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कांग्रेस कमेटी के चेयरपर्सन प्रसेनजीत बोस की याचिका पर कर रहा है। याचिका में करीब 58 लाख मतदाताओं को कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट ने अब चुनाव आयोग को इन मामलों के तेजी से निपटारे के लिए एक ठोस रणनीति पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि क्या मौजूदा न्यायिक संसाधन काफी हैं या फिर बड़े स्तर पर अतिरिक्त उपाय किए जाने की जरूरत है।
