Dixon Technologies के शेयरों में आज **2%** की गिरावट देखी गई, भले ही कंपनी ने तिमाही के नतीजों में **159%** का शानदार मुनाफा दर्ज किया हो। कंपनी की लंबी अवधि की रेवेन्यू ग्रोथ और कर्ज में कमी अच्छी है, लेकिन निवेशक मार्जिन पर दबाव और हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंतित हैं।
नतीजों के बावजूद क्यों गिरी Dixon Technologies?
12 अगस्त 2026 को, Dixon Technologies के शेयर 2.01% गिरकर ₹13,741 पर बंद हुए। यह गिरावट कंपनी की तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद आई, जिसने बाजार को थोड़ा चौंका दिया।
तिमाही नतीजे क्या कहते हैं?
जून 2026 तिमाही के लिए, Dixon Technologies का रेवेन्यू 21.13% बढ़कर ₹15,547.66 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट 159.53% की छलांग लगाकर ₹709.19 करोड़ तक पहुंच गया। ये आंकड़े कंपनी की जबरदस्त ग्रोथ दिखा रहे हैं, लेकिन शेयर में गिरावट बताती है कि बाजार इन नतीजों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।
कंपनी की आर्थिक सेहत
कंपनी का कर्ज पिछले चार फाइनेंशियल ईयर में काफी कम हुआ है। मार्च 2022 में जहां डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.46 था, वहीं मार्च 2026 तक यह घटकर सिर्फ 0.10 रह गया है। इस दौरान रेवेन्यू में 356% से ज्यादा का इजाफा हुआ है, जो भारत में एक प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के तौर पर कंपनी की भूमिका को दर्शाता है।
मार्जिन पर दबाव और वैल्यूएशन का खेल
फिलहाल, बाजार की नजर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर है। बढ़ती लागत, खासकर मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी, सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल रही है। Dixon Technologies का वैल्यूएशन भी काफी हाई है, जिसका P/E रेश्यो मार्च 2026 के आंकड़ों के हिसाब से 35 से ऊपर है। ऐसे में, मार्जिन को लेकर हल्की सी भी चिंता शेयर की कीमतों में अस्थिरता ला सकती है।
आगे क्या?
निवेशक अब कंपनी के भविष्य की योजनाओं पर नजर रखेंगे। स्मार्टफोन निर्माता Vivo के साथ नया ज्वाइंट वेंचर (JV) एक अहम डेवलपमेंट है। इस पार्टनरशिप से रेवेन्यू का योगदान अक्टूबर-दिसंबर तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट की सफलता कंपनी की एग्जीक्यूशन क्षमता और कच्चे माल की कीमतों के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने पर निर्भर करेगी।
