Dishman Carbogen Amcis: रेटिंग घटी, पर कंपनी का दावा - 'हमारा बिजनेस और फाइनेंशियल्स सुधर रहे हैं!'

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AuthorAditya Rao|Published at:
Dishman Carbogen Amcis: रेटिंग घटी, पर कंपनी का दावा - 'हमारा बिजनेस और फाइनेंशियल्स सुधर रहे हैं!'
Overview

Dishman Carbogen Amcis ने हाल ही में India Ratings द्वारा क्रेडिट रेटिंग में की गई कटौती पर स्पष्टीकरण जारी किया है। एजेंसी ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म रेटिंग को 'A' और शॉर्ट-टर्म रेटिंग को 'A1' किया है, साथ ही 'Negative' आउटलुक दिया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह रेटिंग उसके सुधरते बिजनेस और फाइनेंशियल परफॉरमेंस को नहीं दर्शाती, और उसने अपने कंसोलिडेटेड नेट लीवरेज में सुधार और EBITDA मार्जिन को मजबूत करने पर जोर दिया है।

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रेटिंग में गिरावट पर कंपनी का जवाब

India Ratings & Research ने Dishman Carbogen Amcis की क्रेडिट रेटिंग को घटा दिया है। एजेंसी ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म इंडिया क्रेडिट फैसिलिटी को 'IND A' और शॉर्ट-टर्म फैसिलिटी को 'IND A1' कर दिया है, साथ ही 'Negative' आउटलुक जारी किया है। यह कदम 18 फरवरी 2026 को उठाया गया था, जिस पर कंपनी ने 23 फरवरी 2026 को अपना विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है।

प्रदर्शन में सुधार पर कंपनी का जोर

Dishman Carbogen Amcis ने साफ किया है कि यह रेटिंग डाउनग्रेड उसके सुधरते बिजनेस और फाइनेंशियल परफॉरमेंस को ठीक से नहीं दर्शा रहा है। कंपनी ने अपने कंसोलिडेटेड नेट लीवरेज (Consolidated Net Leverage) में आए सुधार पर प्रकाश डाला है, जो 3.18x हो गया है, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में यह 3.92x था। इसके अलावा, कंपनी के EBITDA मार्जिन (EBITDA Margins) भी मजबूत हुए हैं, जो 25.68% तक पहुंच गए हैं, जबकि FY25 में ये 19.35% थे।

रेटिंग एजेंसी की चिंताएं

दूसरी ओर, रेटिंग एजेंसी ने कंपनी पर लगातार ऊंचे कर्ज (Persistently High Debt) और मार्जिन में गिरावट (Contracting Margins) को रेटिंग घटाने का मुख्य कारण बताया है। हाल ही में शुरू हुई नई फ्रेंच फैसिलिटी से भी EUR 9.8 मिलियन का EBITDA लॉस दर्ज हुआ है, जो कंपनी की आय पर दबाव डाल रहा है।

फंड जुटाने की योजना

इन वित्तीय चिंताओं को दूर करने के लिए, Dishman Carbogen Amcis ₹10 अरब तक फंड जुटाने की योजना बना रही है। यह फंड Qualified Institutional Placement (QIP) या प्रेफरेंशियल शेयर्स के माध्यम से जुटाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य महंगे कर्ज को चुकाना और कंपनी के लीवरेज मेट्रिक्स को बेहतर बनाना है।

आगे क्या देखना होगा

  • कैपिटल रेज़: कंपनी ₹10 अरब का फंड जुटाने में कितनी सफल होती है और इसे कब तक पूरा करती है।
  • डेट रिडक्शन: फंड जुटाने के बाद कुल कर्ज में कितनी कमी आती है और नेट लीवरेज रेशियो किस स्तर पर आता है।
  • EBITDA मार्जिन: सभी सेगमेंट्स, खासकर फ्रेंच फैसिलिटी के मार्जिन में लगातार सुधार पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
  • स्टैंडअलोन परफॉरमेंस: भारत स्थित स्टैंडअलोन ऑपरेशंस के टर्नअराउंड और क्रेडिट मेट्रिक्स का मूल्यांकन करना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.