Amazon छोड़ी, Nashik में नई ज़िंदगी! ₹35 लाख की नौकरी छोड़ महिला ने खोला डिजिटल मार्केटिंग का बिज़नेस

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Amazon छोड़ी, Nashik में नई ज़िंदगी! ₹35 लाख की नौकरी छोड़ महिला ने खोला डिजिटल मार्केटिंग का बिज़नेस

एक 31 साल की महिला डिजिटल मार्केटर ने मुंबई की Amazon की हाई-पेइंग जॉब को छोड़ दिया है और अब वह Nashik में बस गई हैं। कम इनकम और कम खर्च वाली जीवनशैली अपनाकर, उन्होंने अपनी पर्सनल फाइनेंस को बेहतर बनाने और वर्क-लाइफ बैलेंस को सुधारने का दावा किया है।

Detailed Coverage

मुंबई की हाई-फाई लाइफ से Nashik का सुकून

यह कहानी है 31 साल की एक डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट की, जिन्होंने मुंबई में Amazon जैसी बड़ी कंपनी में ₹30 लाख से ₹35 लाख सालाना की नौकरी को अलविदा कह दिया। Nashik शिफ्ट होने का फैसला सिर्फ लोकेशन बदलने का नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और फाइनेंसियल प्लानिंग में एक बड़ा बदलाव है। इसकी वजह बनीं हाइब्रिड ऑफिस पॉलिसी की बढ़ती डिमांड और मुंबई में रहने का भारी खर्च।

बड़े शहरों के खर्चे का असर

यह मामला दिखाता है कि बड़े मेट्रो शहरों में हाई-टियर कॉरपोरेट जॉब्स पर्सनल फाइनेंस पर कितना बोझ डाल सकती हैं। महिला ने बताया कि उन्हें अपने ऑफिस के पास एक बेडरूम के फ्लैट के लिए हर महीने ₹65,000 रेंट देना पड़ता था। इसके अलावा, औरंगाबाद और Nashik में परिवार से मिलने जाने का खर्च अलग। इतनी मोटी सैलरी के बावजूद, ये फिक्स्ड खर्चे कमाई का बड़ा हिस्सा खा जाते थे। जब ऑफिस आने की जरूरत 2 दिन से बढ़कर 5 दिन हो गई, तो उन्होंने लाइफस्टाइल पर फिर से विचार करने का मन बना लिया।

फाइनेंसियल स्थिरता और घर की आमदनी

Nashik आने के बाद, उनके कपल की जॉइंट इनकम घटकर लगभग ₹40 लाख रह गई है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद अब उनकी नेट सेविंग्स की पोजीशन बेहतर हुई है। भारी-भरकम रेंट और रोजमर्रा के खर्चों से छुटकारा पाने के बाद, कपल अब ज्यादा रेगुलर तरीके से पैसे बचा पा रहा है। पहले हाई-प्रेशर कॉरपोरेट लाइफ में सेविंग्स कभी होती थी, कभी नहीं, लेकिन अब यह नई व्यवस्था सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और दूसरी लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए डिसिप्लिनड तरीके से कंट्रीब्यूट करने की इजाजत देती है।

करियर रिस्क और हेल्थ का मैनेजमेंट

सिर्फ पैसों का एडजस्टमेंट ही नहीं, इस मूव ने कॉरपोरेट दुनिया की अनिश्चितताओं को भी कम किया है। महिला ने बताया कि परफॉर्मेंस रिव्यू और जॉब कटने के डर से मुक्ति पाना सबसे बड़ा फायदा है। अब वह एक बिजनेस पार्टनर के साथ मिलकर अपनी डिजिटल मार्केटिंग फर्म चलाती हैं, जिससे उनके दिन के शेड्यूल पर उनका ज्यादा कंट्रोल रहता है। इस बदलाव से हेल्थ पर भी बेहतर फोकस कर पाई हैं, जो पहले कॉरपोरेट प्रेशर के चलते कहीं पीछे छूट गया था। यह ट्रेंड उन इन्वेस्टर्स के लिए गौर करने लायक है जो टियर-2 शहरों की फ्लेक्सिबिलिटी और एंटरप्रेन्योरियल रास्ते को बड़ी टेक कंपनियों की स्टेबिलिटी और हाई सैलरी पैकेज के मुकाबले तौल रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.