Devson Catalyst के शेयर आज शेयर बाज़ार में धमाकेदार एंट्री के साथ लिस्ट हुए हैं। कंपनी के शेयर IPO प्राइस ₹118 के मुकाबले **66%** की उछाल के साथ ₹196 पर खुले। निवेशकों ने IPO में **220** गुना से ज़्यादा का भरोसा दिखाया था।
₹196 पर लिस्ट हुआ Devson Catalyst
Devson Catalyst Limited ने आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर शानदार शुरुआत की है। कंपनी के शेयर ₹196 के भाव पर लिस्ट हुए, जो कि इसके IPO प्राइस ₹118 से 66% ज़्यादा है। इस जोरदार लिस्टिंग ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। IPO के दौरान, निवेशकों ने 220.35 गुना से ज़्यादा बोली लगाकर इस इश्यू पर ज़बरदस्त भरोसा जताया था। यह सब्सक्रिप्शन 9 जुलाई से 11 जुलाई के बीच चला था।
बिज़नेस मॉडल और विस्तार की तैयारी
साल 2004 से काम कर रही Devson Catalyst, कैटेलिस्ट, एडसॉर्बेंट और सिरेमिक बॉल जैसे ज़रूरी प्रोडक्ट बनाती है। ये प्रोडक्ट पेट्रोलियम रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील और फर्टिलाइजर जैसे बड़े उद्योगों के लिए अहम हैं। कंपनी बिज़नेस-टू-बिज़नेस मॉडल पर काम करती है और इसके ग्राहकों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हैं।
कंपनी की अभी 6,205 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है। IPO से जुटाए गए ₹42.34 करोड़ का इस्तेमाल गुजरात के वाधवान सिटी में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में किया जाएगा। इस विस्तार से कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी और इंडस्ट्रियल ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करेगी। IPO से मिले फंड का कुछ हिस्सा वर्किंग कैपिटल और दूसरे कॉर्पोरेट खर्चों के लिए भी इस्तेमाल होगा।
निवेशकों के लिए खास बातें और रिस्क
SME शेयरों में लिस्टिंग के दिन भले ही अच्छा रिटर्न मिले, लेकिन इनमें लिक्विडिटी (तरलता) और वोलेटिलिटी (अस्थिरता) की दिक्कतें हो सकती हैं। Devson Catalyst जिस स्पेशियलिटी केमिकल सेक्टर में है, वो रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री की डिमांड पर बहुत निर्भर करता है। इन सेक्टर्स में किसी भी तरह की मंदी या कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकता है।
यह देखना अहम होगा कि कंपनी वाधवान सिटी में अपनी नई यूनिट को बिना किसी देरी या अतिरिक्त खर्च के सफलतापूर्वक चालू कर पाती है या नहीं। साथ ही, कंपनी के बड़े इंडस्ट्रियल क्लाइंट्स के साथ लंबे समय तक बने रहने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि किसी बड़े कॉन्ट्रैक्ट का छिन जाना रेवेन्यू को प्रभावित कर सकता है। गुजरात प्लांट की टाइमलाइन और आने वाले तिमाही नतीजों पर निवेशकों को बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।
