Delhi सरकार ने ट्रैफिक नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब किसी भी चालान को कोर्ट में चुनौती देने से पहले चालान राशि का **50%** हिस्सा जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, अब सभी उल्लंघनों के लिए डिजिटल साक्ष्य (visual evidence) दिखाना जरूरी कर दिया गया है।
नियम में बड़ा बदलाव
दिल्ली सरकार ने अपने ट्रैफिक इंफोर्समेंट सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने की कवायद शुरू कर दी है। सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के साथ तालमेल बिठाते हुए, सरकार ने तय किया है कि अगर कोई भी वाहन चालक चालान को अदालत में चुनौती देना चाहता है, तो उसे सबसे पहले कुल जुर्माने का 50% अमाउंट बतौर डिपॉजिट जमा करना होगा। यह कदम न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते मुकदमों के दबाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
45 दिन का नया टाइमलाइन
नए फ्रेमवर्क के तहत, ट्रैफिक उल्लंघन की जानकारी मिलने के बाद चालान भरने या शिकायत दर्ज करने के लिए 45 दिनों का एक तय समय दिया गया है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए शिकायतों का निपटारा किया जाएगा, जिसे ग्रीवेंस ऑफिसर्स (Grievance Officers) और ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारी रिव्यू करेंगे। अगर 45 दिनों तक कोई एक्शन नहीं लिया गया, तो सिस्टम इसे 'स्वीकार्य' मान लेगा और अगले 30 दिनों के भीतर पूरा जुर्माना भरना होगा।
सर्विलांस टेक और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अवसर
यह कदम केवल ट्रैफिक मैनेजमेंट तक सीमित नहीं है। इसमें ई-चालान सिस्टम, ऑटोमेटेड कैमरा नेटवर्क और इमेज रिकग्निशन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक सुविधाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। सरकार का यह रुख स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत सर्विलांस हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एनालिटिक्स कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
डिजिटल पारदर्शिता और रेवेन्यू एफिशिएंसी
अब ई-चालान उल्लंघन के 3 दिनों के भीतर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेज दिए जाएंगे, और यदि डिजिटल संपर्क नहीं हो पाता है, तो 15 दिनों के भीतर फिजिकल नोटिस भेजा जाएगा। डिजिटल ट्रैक और ऑटोमेटेड सिस्टम के कारण सरकारी राजस्व कलेक्शन (Revenue Collection) की प्रक्रिया में सुधार आने की उम्मीद है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो, गवर्नमेंट-टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विलांस के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए यह एक बड़े स्केल का अवसर साबित हो सकता है।
