Delhi NCR में साल 2030 तक लग्जरी होटल के **6,000** नए कमरे जुड़ने वाले हैं। Juniper Hotels, Chalet Hotels और DS Group जैसे बड़े खिलाड़ी इस रेस में आगे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि **4,000 से 5,000** कमरे ही हकीकत में तैयार हो पाएंगे।
बड़े होटल चेन्स की नजरें दिल्ली पर
दिल्ली NCR में लग्जरी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में तेजी का दौर है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और कन्वेंशन स्पेस की बढ़ती मांग को देखते हुए होटल कंपनियां अपना विस्तार कर रही हैं। इंडिगो गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर के पास निवेश की बाढ़ सी आ गई है।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और निवेश
इस दौड़ में शामिल कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं:
- Juniper Hotels: द्वारका में 'Grand Hyatt' प्रोजेक्ट के लिए ₹850 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।
- Chalet Hotels: एयरपोर्ट के पास ताज-ब्रांडेड प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जो फाइनेंशियल ईयर 2027 की चौथी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है।
- DS Group: Marriott International के साथ मिलकर 200 कमरों वाला 'W Hotel' बना रही है, जिसका लक्ष्य साल 2027 का अंत है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
दिल्ली NCR में होटलों की ऑक्यूपेंसी रेट लगातार 75% से ऊपर बनी हुई है, जो इस विस्तार को एक मजबूत आधार देती है। लेकिन, लिस्टेड कंपनियों के लिए चुनौती डेट मैनेजमेंट की है। उदाहरण के तौर पर, Chalet Hotels का कर्ज करीब ₹20,405 मिलियन है, और वे इन अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टीज के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं।
क्या है रिस्क?
निवेशकों को इन तीन बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- एक्जीक्यूशन रिस्क: जमीन अधिग्रहण और रेगुलेटरी अप्रूवल में देरी से लागत बढ़ सकती है।
- फाइनेंशियल रिस्क: प्रोजेक्ट्स के लिए लिए गए बड़े कर्ज से मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
- साइक्लिकल नेचर: हॉस्पिटैलिटी सेक्टर इकोनॉमी पर निर्भर है। अगर कॉर्पोरेट ट्रैवल या कॉन्फ्रेंस में गिरावट आती है, तो रिटर्न मिलने में देरी हो सकती है।
शेयरधारकों को अब इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की टाइमलाइन पर खास नजर रखनी होगी, क्योंकि किसी भी देरी का सीधा असर रेवेन्यू प्रोजेक्शन पर पड़ेगा।
