दिल्ली और मुंबई के नगर निगमों ने मिलकर डिमोलिशन और एन्फोर्समेंट के लिए **₹34.1 करोड़** का बजट आवंटित किया है। हालिया हादसों के बाद अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर यह कड़ा कदम उठाया गया है।
देश के दो सबसे बड़े महानगरों की नगर पालिकाओं ने बिल्डिंग सेफ्टी और अवैध निर्माणों के खिलाफ अपना रवैया पूरी तरह बदल दिया है। 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर के लिए MCD और BMC ने मिलकर कुल ₹34.1 करोड़ का बजट तय किया है, ताकि शहर में असुरक्षित ढांचों को गिराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
मुंबई: एन्फोर्समेंट पर 5 गुना खर्च
Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) इस मामले में सबसे आक्रामक रुख अपना रही है। इनका एन्फोर्समेंट बजट ₹17.5 करोड़ तक पहुँच गया है, जो 2023-24 में मात्र ₹3.31 करोड़ था। यह पांच गुना बढ़ोतरी साफ इशारा करती है कि अब अवैध फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) और बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
दिल्ली: सुरक्षा पर बढ़ाया फोकस
राजधानी दिल्ली में भी Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने सुरक्षा के मद्देनजर अपने खर्च में 54% की बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹16.6 करोड़ कर दिया है। सत्य निकेतन जैसे हालिया हादसों के बाद नगर निगम अब पीजी, स्टूडेंट हॉस्टल्स और रेजिडेंशियल इलाकों में बनी कमर्शियल इमारतों की गहन जांच कर रहा है।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
हालांकि बजट बढ़ाना एक शुरुआत है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौती काफी बड़ी है। डेमोलिशन के दौरान लीगल सपोर्ट, साइट क्लीयरेंस और लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी ज्यादा होता है। हजारों अवैध संपत्तियों की पहचान होने के बाद, यदि कार्रवाई की गति बढ़ती है, तो निगमों को अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ सकती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह बढ़ाया गया बजट अवैध निर्माणों को पूरी तरह रोक पाने में सक्षम होगा या सरकार को भविष्य में और फंड्स जारी करने होंगे।
