Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने शहर में सर्वे के बाद 21,000 अवैध कमर्शियल प्रॉपर्टीज की पहचान की है। Supreme Court के सख्त आदेशों के बाद अब इन दुकानों और बिजनेस यूनिट्स पर सीलिंग का खतरा मंडरा रहा है, जिससे दिल्ली के रिटेल कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भारी सर्वे के बाद आया फैसला
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी भर की 4,00,000 इमारतों का गहन सर्वे किया, जिसके बाद यह बड़ा खुलासा हुआ है। रिहायशी (Residential) इलाकों में नियम तोड़कर चल रहे कोचिंग सेंटर्स, रेस्टोरेंट्स और रिटेल दुकानों पर प्रशासन की नजर टेढ़ी हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट का है कड़ा रुख
यह कार्रवाई मार्च 2026 में आए Supreme Court के एक फैसले के बाद शुरू की गई है। कोर्ट ने 'Loganathan versus State of Tamil Nadu' मामले का हवाला देते हुए सभी केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए थे कि रिहायशी क्षेत्रों में अवैध कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती से लगाम लगाई जाए। MCD का यह कदम 2006 की मिक्स्ड-लैंड-यूज पॉलिसी के तहत ही उठाया गया है।
किन प्रॉपर्टीज पर है खतरा?
राहत की बात यह है कि सभी 21,000 प्रॉपर्टीज को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। डेटा के अनुसार:
- करीब 7,000 मालिकों ने कानूनी रूप से अपना कन्वर्जन चार्ज भर दिया है।
- लगभग 6,000 प्रॉपर्टीज मिक्स्ड-लैंड-यूज वाली सड़कों पर हैं, जिन्हें नियमों के तहत छूट मिली हुई है।
संकट उन बची हुई प्रॉपर्टीज के लिए है, जिन्होंने न तो कन्वर्जन चार्ज भरा है और न ही नियम पूरे किए हैं।
निवेशकों और दुकानदारों के लिए चेतावनी
रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर से जुड़े निवेशकों के लिए यह एक बड़ा रेगुलेटरी रिस्क है। जिन लोगों ने अभी तक अपना कन्वर्जन प्रोसेस पूरा नहीं किया है, उन्हें पेनल्टी या किराये के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले समय में MCD प्रभावित मालिकों को नोटिस भेजेगी, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से सीलिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
