Delhi Lakshmi Yojana: पहले ही दिन 1.47 लाख महिलाओं ने किया रजिस्ट्रेशन, जानें क्या है स्कीम

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AuthorMehul Desai|Published at:
Delhi Lakshmi Yojana: पहले ही दिन 1.47 लाख महिलाओं ने किया रजिस्ट्रेशन, जानें क्या है स्कीम

दिल्ली सरकार की नई 'लक्ष्मी योजना' ने पहले ही दिन रिकॉर्ड तोड़ रजिस्ट्रेशन दर्ज किए हैं। इस स्कीम के तहत योग्य महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक मदद मिलेगी, जिसका कुछ हिस्सा सीधे खाते में और बाकी हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा होगा।

पहले दिन ही दिखी स्कीम की धूम!

दिल्ली सरकार ने 1 अगस्त 2026 को अपनी महत्वाकांक्षी 'लक्ष्मी योजना' की शुरुआत की, और पहले ही दिन इसे लोगों का ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला। 2 अगस्त की शाम तक, ऑनलाइन पोर्टल पर 1,47,215 रजिस्ट्रेशन हो चुके थे, जिनमें से 10,286 एप्लीकेशन प्रोसेसिंग के लिए सबमिट भी कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस स्कीम को लॉन्च किया, जो भारतीय जनता पार्टी के चुनावी वादों में से एक थी।

फायदे का अनोखा स्ट्रक्चर

यह स्कीम बाकी कैश ट्रांसफर योजनाओं से बिल्कुल अलग है। पात्र महिलाओं को हर महीने कुल ₹2,500 मिलेंगे। इसमें से ₹1,000 सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे, जबकि ₹1,500 की तीन साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई जाएगी। सरकार का प्लान है कि सभी एप्लीकेशन की वेरिफिकेशन के बाद रक्षाबंधन के आसपास पहली किस्त जारी कर दी जाए।

कौन हो सकता है शामिल?

इस योजना का लाभ 21 से 60 साल की ऐसी महिलाएं उठा सकती हैं, जिनके परिवार की सालाना इनकम ₹2.5 लाख से कम है। हालांकि, कुछ शर्तें भी हैं। जो महिलाएं पहले से कोई सरकारी पेंशन या सहायता ले रही हैं, इनकम टैक्स भरने वाली महिलाएं, सरकारी कर्मचारी या उनके परिवार के सदस्य, और जिनके परिवार में चार-पहिया वाहन है या सालाना 2,400 यूनिट से ज़्यादा बिजली की खपत होती है, वे इस स्कीम के लिए योग्य नहीं होंगी। इसके अलावा, अप्लाई करने के लिए लोकल सांसद (MP) या विधायक (MLA) की सिफारिश ज़रूरी है। क्रिमिनल रिकॉर्ड वाली महिलाओं को भी बाहर रखा गया है।

आर्थिक पहलू पर नज़र

निवेशकों और दिल्ली की आर्थिक नीतियों पर नज़र रखने वालों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि इस स्कीम का सरकारी खजाने पर क्या असर पड़ेगा। भले ही वेलफेयर खर्च से लोकल खपत बढ़ती है, लेकिन यह सरकार की देनदारियों को भी बढ़ाता है। मार्केट एनालिस्ट्स इस तरह के बड़े खर्चों पर बारीकी से नज़र रखते हैं कि यह राज्य के बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और कैपिटल खर्च के लिए फंड की उपलब्धता को कैसे प्रभावित करेगा। स्कीम के आगे बढ़ने के साथ-साथ, वेरिफिकेशन प्रोसेस का एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट और कैश ट्रांसफर व फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए लगातार फंड की ज़रूरत, ये सभी अहम फैक्टर होंगे जिन पर ध्यान देना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.