सितंबर 2026 में होने वाले BRICS Summit के चलते दिल्ली के प्रमुख होटलों में भारी भीड़ है। ऑक्यूपेंसी फुल होने से होटलों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन निवेशकों को फूड सेफ्टी नोटिस जैसे जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए।
दिल्ली का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर इन दिनों एक बड़े सप्लाई क्रंच का सामना कर रहा है। 11 से 13 सितंबर 2026 को होने वाले BRICS Summit के कारण The Taj Mahal, Taj Palace, The Oberoi और The Leela Palace जैसे दिग्गज होटल पूरी तरह बुक हो चुके हैं या उन्होंने नई बुकिंग बंद कर दी है। डिप्लोमैटिक डिस्ट्रिक्ट में इन्वेंट्री खत्म होने की वजह से बचे हुए होटलों ने रूम रेंट को 6 डिजिट यानी लाखों में पहुंचा दिया है।
रेवेन्यू पर असर और RevPAR
इन्वेस्टर्स के लिए इस दौरान RevPAR (Revenue Per Available Room) एक अहम पैमाना है। जब ऑक्यूपेंसी 100% के करीब होती है, तो होटलों के पास कीमतें बढ़ाने की जबरदस्त पावर आ जाती है। Indian Hotels Company Limited (IHCL) और ITC Hotels जैसे बड़े खिलाड़ियों को इस हाई-मार्जिन रेवेन्यू का सीधा फायदा मिल सकता है। हालांकि, होटल सेक्टर काफी साइक्लिकल होता है, इसलिए यह देखना जरूरी है कि क्या कंपनियां इवेंट के बाद भी यह डिमांड और प्राइसिंग बनाए रख पाएंगी।
रेगुलेटरी रिस्क की चुनौती
इस कमाई की दौड़ में ऑपरेशनल रिस्क भी बढ़ गए हैं। FSSAI ने हाल ही में Andaz Delhi और JW Marriott Aerocity जैसे होटलों को हाइजीन और फूड सेफ्टी मानकों को लेकर नोटिस जारी किए हैं। शेयरधारकों को ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में सर्विस में चूक होने पर न केवल कंपनी की साख (reputation) गिरती है, बल्कि उन पर भारी जुर्माना भी लग सकता है।
मार्केट का रुख
अच्छे ऑक्यूपेंसी डेटा के बावजूद होटल स्टॉक्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। बाजार इस बात को लेकर सतर्क है कि समिट खत्म होने के बाद क्या ये महंगे टैरिफ टिक पाएंगे। निवेशकों के लिए अगली तिमाही के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या यह रेवेन्यू ग्रोथ नेट प्रॉफिट में बदल पाई है या इवेंट मैनेजमेंट और सिक्योरिटी के बढ़ते खर्चों ने मुनाफे को दबा दिया है।
