दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर यानी **451 AQI** पर पहुंच गई है। बिगड़ते हालात को देखते हुए पूरे NCR में GRAP-II के सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं, जिसका सीधा असर कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है।
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अब 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच चुका है, जहां मंगलवार सुबह AQI का आंकड़ा 451 दर्ज किया गया। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी, पंजाबी बाग और बवाना जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर 400 के पार निकल गया है। दिवाली से ठीक पहले हवा की यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
उद्योगों पर क्या होगा असर?
CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) द्वारा लागू किए गए GRAP-II के तहत अब नियमों का पालन करना अनिवार्य है। म्यूनिसिपल और ट्रैफिक अथॉरिटीज ने सड़कों पर धूल कम करने के लिए पानी के छिड़काव और मैकेनिकल स्वीपिंग बढ़ा दी है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन को लेकर है। सख्त निगरानी और उत्सर्जन मानकों के चलते निर्माण कार्यों में देरी और ऑपरेटिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
इसके अलावा, गाजीपुर बॉर्डर जैसे प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर ट्रैफिक पुलिस ने भारी वाहनों की सघन चेकिंग शुरू कर दी है। इससे गुड्स की आवाजाही में देरी हो सकती है, जो लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है।
रेगुलेटरी रिस्क और आगे का रास्ता
अगर वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो अधिकारी GRAP-III या उससे आगे के सख्त कदम उठा सकते हैं, जिसमें निर्माण और गैर-जरूरी औद्योगिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हो सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे सरकारी गाइडलाइंस पर नजर रखें, क्योंकि प्रदूषण के बढ़ते स्तर का असर सीधे तौर पर प्रोजेक्ट्स की लागत और त्योहारों के दौरान बाजार की मांग पर भी पड़ सकता है।
