फंड के इस्तेमाल में बड़ी गड़बड़ का खुलासा
BSE को दी गई जानकारी के अनुसार, Deep Diamond India Limited ने 6 अक्टूबर, 2025 को किए गए अपने ₹39.98 करोड़ के राइट्स इश्यू (Rights Issue) से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल में कई गंभीर गड़बड़ियां की हैं। यह कंपनी के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इश्यू खर्चों में ओवररन: कंपनी ने इश्यू खर्चों के लिए ₹35.00 Lakhs का बजट रखा था, लेकिन असल में ₹48.86 Lakhs खर्च कर दिए। यह बजट से ₹13.86 Lakhs यानी 39.60% ज्यादा है।
उद्देश्य में बड़ा बदलाव: सबसे चिंताजनक बात यह है कि राइट्स इश्यू का मुख्य उद्देश्य ही बदल दिया गया है। पहले इसका मकसद इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत Oasis Ceramics Private Limited का अधिग्रहण करना था। अब इसे बदलकर दूसरी कंपनियों के इक्विटी शेयर्स/सिक्योरिटीज (Securities) में निवेश करना कर दिया गया है। यह कंपनी की रणनीति में एक बहुत बड़ा फेरबदल है।
अप्रूवल्स का समय और अप्रयुक्त फंड: इस बड़े बदलाव के लिए शेयरधारकों की मंजूरी 22 जनवरी, 2026 को मिली, जो कि 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई रिपोर्टिंग तिमाही के बाद की है। इसका मतलब है कि कंपनी ने अप्रूवल मिलने से पहले ही इस नए उद्देश्य के लिए फंड रखने शुरू कर दिए थे। बड़ी मात्रा में ₹2,258.98 Lakhs अप्रयुक्त पड़े थे और बैंक में जमा थे।
निवेशकों के लिए जोखिम और कॉर्पोरेट गवर्नेंस
इस खुलासे से निवेशकों के लिए कई तरह के जोखिम पैदा हो गए हैं:
- पारदर्शिता की कमी: फंड के इस्तेमाल में यह बड़े बदलाव, खासकर उद्देश्य का बदलना, निवेशकों के साथ पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने शुरुआती उद्देश्यों के आधार पर ही राइट्स इश्यू में निवेश किया था।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: अब दूसरी कंपनियों में निवेश करने की नई रणनीति नए एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) लेकर आती है, जिसमें ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence), वैल्यूएशन (Valuation) और उन निवेशों के खराब प्रदर्शन का खतरा शामिल है।
- गवर्नेंस पर सवाल: फंड के ऑब्जेक्टिव में बड़े बदलाव के लिए रिपोर्टिंग अवधि के बाद शेयरहोल्डर अप्रूवल लेना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) पर सवालिया निशान लगाता है। यह कंपनी के एक्शन और हितधारकों की सहमति के बीच समय के अंतर को दर्शाता है।
निवेशकों को अब Deep Diamond India Limited की भविष्य की फाइलिग्स पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए ताकि यह समझ सकें कि कंपनी किन विशिष्ट संस्थाओं में निवेश करने की योजना बना रही है और इन नए निवेशों का प्रदर्शन कैसा रहता है। खर्चों के प्रबंधन में यह विचलन, हालांकि राशि में छोटा है, लेकिन वित्तीय अनुशासन के प्रति समग्र चिंता को बढ़ाता है। कंपनी की संशोधित निवेश रणनीति को लागू करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।