ग्लोबल पोर्ट ऑपरेटर DP World भारत के पोर्ट सेक्टर में **$5 बिलियन** तक का निवेश करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, कंपनी ने मौजूदा **30-वर्षीय** कंसेशन मॉडल को बदलने की मांग की है ताकि प्रोजेक्ट्स को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके।
पॉलिसी में बदलाव क्यों चाहती है कंपनी?
DP World का मानना है कि भारत का मौजूदा 30-वर्षीय कंसेशन मॉडल लंबी अवधि के विकास के लिए बाधा बन रहा है। कंपनी ने अब तक भारत में $3 बिलियन का निवेश किया है। वे चाहते हैं कि सरकार जमीन और बुनियादी ढांचे का मालिकाना हक अपने पास रखे, जबकि प्राइवेट पार्टनर ऑपरेशंस को संभालें।
Vadhavan पोर्ट पर टिकी नजरें
महाराष्ट्र के प्रस्तावित Vadhavan पोर्ट प्रोजेक्ट की लागत करीब $10 बिलियन आंकी गई है, जिसमें DP World $3 से $5 बिलियन तक लगाने की योजना बना रही है। हालांकि, यह निवेश सरकारी नियमों पर निर्भर करेगा। कंपनी का कहना है कि सख्त टैरिफ कंट्रोल और रेवेन्यू-शेयरिंग के पेचीदा समझौते बड़े निवेश को हतोत्साहित करते हैं।
गेटवे पोर्ट बनाम ट्रांसशिपमेंट हब
कंपनी के मुताबिक, भारत को 'ट्रांसशिपमेंट हब' के बजाय 'गेटवे पोर्ट्स' पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इससे स्थानीय इंडस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग को सीधा फायदा मिलेगा।
निवेशकों के लिए सबक
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में रेगुलेटरी स्पष्टता और कॉन्ट्रैक्ट की अवधि सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। Jebel Ali जैसे पोर्ट्स पर हालिया ग्लोबल ट्रेड बाधाओं ने यह दिखा दिया है कि पोर्ट ऑपरेटरों को वोलेटाइल सप्लाई चेन के बीच तालमेल बिठाना जरूरी है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि सरकार पॉलिसी में क्या बदलाव करती है और Vadhavan पोर्ट डील को लेकर क्या ठोस फैसला लिया जाता है।
