Mekedatu Dam विवाद पर DMK का संसद में हंगामा, Delimitation Bill का भी विरोध

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Mekedatu Dam विवाद पर DMK का संसद में हंगामा, Delimitation Bill का भी विरोध

21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में DMK, केंद्र सरकार पर Mekedatu बांध परियोजना और कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे को उठाने की तैयारी में है। पार्टी Delimitation Bill का भी कड़ा विरोध करेगी।

संसद में गूंजेगा Mekedatu Dam का मुद्दा

21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने Mekedatu बांध परियोजना को एक प्रमुख मुद्दा बनाने का ऐलान किया है। पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) नोटिस दाखिल कर इस प्रस्तावित जलाशय पर चर्चा की मांग की है। यह बांध कावेरी और अरकवती नदियों के संगम के पास कर्नाटक में बनाया जाना है।

कावेरी जल बंटवारे पर टकराव

इस विवाद की जड़ कावेरी नदी बेसिन पर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल बंटवारे का मुद्दा है। कर्नाटक का कहना है कि Mekedatu परियोजना बेंगलुरु के लिए पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और क्षेत्र में हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर क्षमता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, तमिलनाडु का तर्क है कि इस बांध के निर्माण से नीचे की ओर बहने वाले पानी की मात्रा काफी कम हो जाएगी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। राज्यसभा सांसद திருச்சி शिवा (Trichy Siva) ने संकेत दिया है कि पार्टी इस गतिरोध को हल करने के लिए एक नए ट्रिब्यूनल (Tribunal) के गठन की मांग करेगी और कर्नाटक पर मौजूदा जल-बंटवारे के समझौतों का पालन न करने का आरोप लगाया है।

Delimitation Bill पर DMK का रुख

जल विवाद के अलावा, DMK ने प्रस्तावित Delimitation Bill के खिलाफ अपने कड़े रुख को दोहराया है। केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की कुल संख्या को 850 तक बढ़ाने के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी में है। DMK ने इस प्रक्रिया का विरोध करने की चेतावनी दी है, यदि इससे दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम होता है। पार्टी को चिंता है कि वर्तमान प्रस्ताव दक्षिण के राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकते हैं, और नेताओं ने कहा है कि वे बिल का वर्तमान स्वरूप में विरोध जारी रखेंगे।

यह संसदीय रणनीति ऐसे समय में आई है जब DMK तमिलनाडु में एक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक परिदृश्य में आगे बढ़ रही है। आगामी सत्र पर इस बात के लिए नजर रखी जाएगी कि केंद्र सरकार इन प्रस्तावों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या चर्चाओं से बांध परियोजना या delimitation ढांचे का कोई औपचारिक पुनर्मूल्यांकन होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.