DMK प्रवक्ता TKS Elangovan ने NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा को खत्म करने की मांग की है और एडमिशन के लिए 12वीं के मार्क्स को मुख्य आधार बनाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि कावेरी नदी का पानी बंटवारा कानूनी ढांचे के तहत ही होना चाहिए और ऊपरी राज्यों के एकतरफा प्रोजेक्ट विकास की आलोचना की।
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मेडिकल एडमिशन पर DMK का रुख
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने दो अहम क्षेत्रीय मुद्दों पर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। पार्टी के प्रवक्ता TKS Elangovan ने एक बार फिर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को खत्म करने की मांग की है। DMK का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा के अंकों को ही मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।
पार्टी का तर्क है कि NEET परीक्षा अमीरों के लिए फायदेमंद है, जो महंगे कोचिंग सेंटर चला सकते हैं। इससे मेधावी छात्र पीछे रह जाते हैं। DMK का मानना है कि स्कूल-स्तरीय प्रदर्शन पर निर्भरता, एक उच्च-दबाव वाली प्रवेश परीक्षा में सफलता की तुलना में लगातार अकादमिक उपलब्धि को बेहतर ढंग से दर्शाएगी। देश भर में लगभग 43,000 प्राइवेट मेडिकल सीटें हैं, जहां एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं।
कावेरी जल प्रबंधन पर भी आवाज
शिक्षा नीति के अलावा, DMK ने कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर भी अपनी मजबूत स्थिति स्पष्ट की है। Elangovan ने जोर देकर कहा कि ऊपरी राज्यों को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (Cauvery Water Disputes Tribunal) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (Cauvery Water Management Authority) के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
पार्टी ने विशेष रूप से कर्नाटक में प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना (Mekedatu dam project) पर चिंता जताई है। DMK का मानना है कि एकतरफा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे दक्षिणी राज्यों में पानी के प्रवाह में गंभीर बाधा आ सकती है। पार्टी का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण संसाधन आवंटन का निर्णय एकतरफा कार्रवाई से नहीं, बल्कि स्थापित कानूनी तंत्र के माध्यम से होना चाहिए।
बाजार पर्यवेक्षकों और हितधारकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि ये राजनीतिक घटनाक्रम क्षेत्रीय नीतियों और अंतर-राज्यीय संबंधों को कैसे प्रभावित करते हैं। भविष्य के अपडेट्स में तमिलनाडु और कर्नाटक के नेतृत्व के बीच अगस्त में होने वाली बैठकों के परिणाम और मेडिकल सीट आवंटन के संबंध में शैक्षिक नियामक नीति में किसी भी संभावित बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
